अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
नई दिल्ली/रांची: देश और झारखंड की राजनीति में ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से अपनी अमिट पहचान बनाने वाले महान आदिवासी नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्य भूषण’ से नवाजा गया है। मंगलवार को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामय नागरिक अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया। दिवंगत शिबू सोरेन की ओर से उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन ने इस सर्वोच्च सम्मान को ग्रहण किया।
सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में उनके अद्वितीय और अद्वितीय योगदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा इस सम्मान की घोषणा की गई थी। राष्ट्रपति भवन में जब रूपी सोरेन यह मेडल और प्रशस्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम और सीना गर्व से चौड़ा हो गया। खराब स्वास्थ्य के बावजूद रूपी सोरेन विशेष रूप से दिल्ली इस ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनने पहुंची थीं, जहां उनके साथ उनकी बहू और विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।
झारखंड आंदोलन के महानायक का राष्ट्रीय सम्मान
शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि अलग झारखंड राज्य आंदोलन के सबसे बड़े स्तंभ थे। उन्होंने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को एक जन-आंदोलन का रूप दिया था। महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष और समाज को जागरूक करने के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक कार्यों ने उन्हें ‘गुरुजी’ का सम्मान दिलाया था।
यह सम्मान न केवल उनके परिवार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के लिए, बल्कि समूचे झारखंड और देश के आदिवासी समाज के लिए गौरव का पल है। समाज सुधार, शिक्षा के प्रसार और शोषितों की आवाज बुलंद करने वाले शिबू सोरेन का यह सम्मान उनकी ऐतिहासिक विरासत को एक राष्ट्रीय पहचान देता है।
शिबू सोरेन लंबे समय तक सांसद रहे, केंद्र सरकार में कोयला मंत्री रहे और उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व भी किया। उनके निधन के बाद से ही देश के इस बड़े आदिवासी चेहरे को सम्मानित करने की मांग चौतरफा उठ रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘पब्लिक अफेयर्स’ की श्रेणी में मिला यह सम्मान शोषितों, वंचितों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित करने वाले एक सच्चे नायक को देश की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।

