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New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत यह निर्णय लिया गया।
जॉर्ज कुरियन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। वह केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र मंत्री माने जाते थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद उनके इस्तीफे की घोषणा हुई।
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कुरियन ने 9 जून 2024 को केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली थी। केरल से आने वाले 65 वर्षीय नेता लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की है। पार्टी संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी और सक्रिय नेता के रूप में रही है। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
भाजपा ने हाल ही में कुछ अन्य नेताओं को भी राज्यसभा चुनाव में दोबारा मौका नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम भी शामिल है। इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि पार्टी कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां दे सकती है। सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन में भी बड़े बदलावों की तैयारी चल रही है। जनवरी में पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने वाले नितिन नवीन की नई टीम की घोषणा जल्द हो सकती है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए कुछ नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव किया जा सकता है।
हाल के दिनों में भाजपा ने पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा और दिल्ली सहित कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। राजनीतिक विश्लेषक इन फैसलों को आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि व्यापक संगठनात्मक और मंत्रिमंडलीय बदलावों की संभावित प्रक्रिया का हिस्सा भी माना जा रहा है। अब सभी की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो इससे सरकार और संगठन दोनों में नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

