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रांची: झारखंड सरकार ने राज्य की चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के सभी सदर और रेफरल अस्पतालों में चार-चार अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह नई एंबुलेंस व्यवस्था वर्तमान में चल रही 108 एंबुलेंस सेवा से पूरी तरह अलग होगी, ताकि आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।
यह महत्वपूर्ण घोषणा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को की। उन्होंने नामकुम स्थित स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों, अस्पताल अधीक्षकों (डीएस) और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में अस्पतालों की कार्यप्रणाली, डॉक्टरों की उपस्थिति, दवाओं की आपूर्ति और आगामी मानसून को देखते हुए स्वास्थ्य तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर गिरेगी गाज
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को अगले 15 दिनों के भीतर स्वास्थ्य व्यवस्था में ठोस और दिखने वाला सुधार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ या काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश दिए कि वे अनिवार्य रूप से अपने-अपने सदर अस्पताल परिसर में ही निवास करें। जो भी अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय छोड़ेंगे, उन्हें तुरंत निलंबित (सस्पेंड) कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जनों को मिलेंगे ज्यादा अधिकार, बढ़ेगी जवाबदेही
एंबुलेंस सेवा को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अस्पतालों को जल्द ही आधुनिक टैबलेट और तकनीकी संसाधन दिए जाएंगे। सिविल सर्जन या अस्पताल अधीक्षक को मरीज की सूचना मिलते ही तुरंत एंबुलेंस भेजने की जिम्मेदारी तय होगी। इसके साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा को निर्देश दिया कि जिला स्तर पर त्वरित फैसले लेने के लिए सिविल सर्जनों को पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार सौंपे जाएं, ताकि वे बिना किसी देरी के स्थानीय समस्याओं को सुलझा सकें।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने भी अधिकारियों को दफ्तरों से निकलकर जमीनी हकीकत जानने और जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान करने की हिदायत दी। बैठक में स्वास्थ्यकर्मियों के लंबित वेतन और ट्रेजरी से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को भी जल्द दूर करने का भरोसा दिया गया।

