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Ahmedabad: गुजरात में अवैध रूप से सीमा पार कर रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद बड़ा और कड़ा अभियान शुरू किया है। इस विशेष अभियान को ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ (Operation Delta Hunt) नाम दिया गया है, जिसके तहत पुलिस अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। अब तक की कार्रवाई में सबसे अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिक राज्य की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद से दबोचे गए हैं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी यह कड़ा अभियान पूरे राज्य में बिना रुके जारी रहेगा।
स्पा सेंटरों की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए बेहद गहन जांच की जा रही है। पुलिस उन शातिर एजेंटों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान कर रही है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारतीय सीमा में घुसाकर गुजरात लाने में शामिल हैं। तफ्तीश में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि गिरफ्तार की गई अधिकांश विदेशी महिलाएं शहर के नामी स्पा सेंटरों (Spa Centers) में काम कर रही थीं।
पश्चिम बंगाल बॉर्डर से घुसे, नारोल बना मुख्य ठिकाना
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों के फिंगरप्रिंट (Fingerprints) लिए जा रहे हैं, ताकि केंद्रीय डेटाबेस से मिलान करके यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कोई व्यक्ति पहले भी किसी अपराध या घुसपैठ में पकड़ा गया है या नहीं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया है कि वे पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते भारत में अवैध रूप से दाखिल हुए थे और फिर वहां से ट्रेनों के जरिए गुजरात पहुंचे। अहमदाबाद के नारोल क्षेत्र को इनका सबसे बड़ा और मुख्य ठिकाना बताया गया है, जहां से सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।
50 हजार की वसूली और नौकरी का झांसा
जेसीपी ने नेटवर्क के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए बताया कि मानव तस्करी (Human Trafficking) से जुड़े ये दलाल प्रत्येक व्यक्ति से भारत में एंट्री कराने के नाम पर 50 हजार रुपये से अधिक की मोटी रकम वसूलते थे। इन नागरिकों को मुख्य रूप से घरेलू कामकाज, फैक्ट्री लेबर या अन्य अच्छे रोजगार दिलाने का लालच देकर गुजरात लाया जाता था, लेकिन यहां पहुंचने के बाद दलालों द्वारा कई मजबूर महिलाओं को डरा-धमकाकर जबरन देह व्यापार (Prostitution) के दलदल में धकेल दिया जाता था।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू, सौराष्ट्र-कच्छ में हाई अलर्ट
पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में पकड़े गए इन सभी बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कानून सम्मत तरीके से देश से बाहर निकालने यानी निर्वासन (Deportation) की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, यदि जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता देश विरोधी गतिविधियों, जासूसी या किसी अन्य गंभीर अपराध में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त आपराधिक मामला दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
तटीय इलाकों में कड़ा पहरा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय इलाकों से भी 53 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कच्छ पूर्व से 27, कच्छ पश्चिम से 7, राजकोट शहर से 5, सुरेंद्रनगर से 5, बोटाद से 3, मोरबी से 2, जबकि जामनगर, देवभूमि द्वारका और जूनागढ़ से 1-1 बांग्लादेशी नागरिक शामिल है।
फिलहाल, गुजरात भर में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 280 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है और उनके पहचान पत्रों व अन्य दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) युद्धस्तर पर किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस बड़े ऑपरेशन से न केवल अवैध घुसपैठ रुकेगी, बल्कि फर्जी दस्तावेज (Fake ID Cards) बनाने वाले गिरोहों और मानव तस्करी के संगठित सिंडिकेट का भी पूरी तरह पर्दाफाश होगा।

