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Thrissur: भारत के केरल राज्य में जमीन की लगातार होती कमी और आसमान छूती कीमतों से निपटने के लिए एक बेहद अनोखा और व्यावहारिक कदम उठाया गया है। केरल के त्रिशूर जिले में स्थित सेंट अल्फोंसा चर्च ने राज्य का पहला दो मंजिला कवर्ड (छत से ढका हुआ) कब्रिस्तान तैयार कराया है। आधुनिक वास्तुकला और जरूरत का यह बेजोड़ मेल आज के समय में सीमित भूमि के बेहतर और प्रभावी उपयोग का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
दो मंजिला अनोखा वर्टिकल मॉडल
भौगोलिक दृष्टि से बेहद सीमित यानी महज एक एकड़ से भी कम क्षेत्र में बने इस आधुनिक कब्रिस्तान में कुल 388 विशेष कब्र कक्ष (कब्र की कोठरियां) बनाए गए हैं। इस पूरे ढांचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरा कब्रिस्तान ऊपर से कंक्रीट की मजबूत छत से पूरी तरह ढका हुआ है। कवर्ड होने की वजह से भारी बारिश, चिलचिलाती धूप और किसी भी तरह के खराब मौसम में भी अंतिम संस्कार की पवित्र रस्में बिना किसी बाधा के गरिमा के साथ पूरी की जा सकती हैं। यह अनूठी सुविधा केरल जैसे घनी आबादी वाले राज्य के लिए बहुत खास महत्व रखती है, जहां कई इलाकों में रिहायशी और धार्मिक कार्यों के लिए जमीन की उपलब्धता लगातार घटती जा रही है।
जमीन की कमी और जरूरत से जन्मा समाधान
चर्च प्रबंधन के पदाधिकारियों के अनुसार, राज्य में लगातार बढ़ती आबादी और भूमि संकट ने पारंपरिक तौर-तरीकों को बदलने और इस तरह की बहुमंजिला व्यवस्था को अपनाने की जरूरत पैदा की। आज के दौर में पारंपरिक कब्रिस्तानों के लिए बड़े भूखंड जुटाना ईसाई समुदाय और स्थानीय प्रशासन के लिए एक लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में ऊर्ध्वाधर यानी वर्टिकल (ऊपर की ओर) निर्माण तकनीक का सहारा लेकर जमीन का ज्यादा से ज्यादा और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहुमंजिला मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।
केरल के मानसूनी मौसम से मिलेगी सुरक्षा
यह कवर्ड संरचना केवल जगह बचाने की समस्या का एकमात्र हल नहीं है, बल्कि यह अंतिम संस्कार में आने वाली मौसम संबंधी दिक्कतों से भी बड़ी सुरक्षा देता है। केरल में होने वाली भारी मानसूनी बरसात के दौरान शवों को दफनाने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतें और अंतिम संस्कार की लंबी प्रक्रिया में पैदा होने वाली बाधाएं अब इस छत वाले कब्रिस्तान के कारण काफी हद तक खत्म हो जाएंगी। इस सराहनीय पहल को आधुनिक तकनीक, धार्मिक परंपरा और तात्कालिक जरूरत के बीच एक बेहतरीन संतुलन का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है।
भविष्य के शहरी भूमि प्रबंधन के लिए बड़ा संकेत
त्रिशूर में बना यह दो मंजिला कब्रिस्तान सिर्फ एक धार्मिक ढांचा मात्र नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए भूमि प्रबंधन (Land Management) का एक क्रांतिकारी और नया विचार भी है। समाज शास्त्रियों का मानना है कि यदि यह मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो देश के अन्य धर्मों और क्षेत्रों में भी सीमित जगहों पर शवों के निस्तारण के लिए इसी तरह की बहुमंजिला और बहुउपयोगी पहल की जा सकती है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों के इस दौर में यह सफल प्रयोग आने वाले समय की अनिवार्य जरूरतों की तरफ एक मजबूत संकेत देता है।

