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देवघर: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली को लेकर देश भर के छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इसी देशव्यापी आक्रोश की गूंज अब बाबा नगरी देवघर में भी सुनाई देने लगी है। शुक्रवार को देवघर के प्रसिद्ध टावर चौक पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के भविष्य के साथ हुए इस खिलवाड़ के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व झामुमो छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष संजय शर्मा, वरिष्ठ नेता सुरेश शाह और मनोज दास ने किया। प्रदर्शन में भारी संख्या में स्थानीय छात्र और युवा कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग की।
लाखों छात्रों के सपनों और मानसिक सेहत पर वार
टावर चौक पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए झामुमो छात्र नेताओं ने कहा कि नीट जैसी प्रतिष्ठित और देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं की कमर तोड़ दी है। दिन-रात एक कर तैयारी करने वाले छात्रों का भविष्य अब अंधकार में नजर आ रहा है।
“परीक्षाओं का बार-बार रद्द होना या विवादों में घिरना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह उन होनहार छात्रों की वर्षों की कड़ी मेहनत और उनकी मानसिक स्थिति पर एक बहुत बड़ा कुठाराघात है, जो डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं।”— संजय शर्मा, जिला अध्यक्ष (झामुमो छात्र संगठन)
धरती के भगवान के साथ कैसा समझौता?
नेताओं ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि मेडिकल के क्षेत्र में होने वाला यह भ्रष्टाचार पूरे समाज के लिए आत्मघाती है। उन्होंने तर्क दिया कि डॉक्टरों को इस धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे लोगों को नया जीवन देते हैं। लेकिन अगर डॉक्टरों को चुनने वाली परीक्षा ही भ्रष्टाचार, बेईमानी और पेपर लीक की भेंट चढ़ जाएगी, तो देश को कैसे योग्य और ईमानदार चिकित्सक मिलेंगे? यह सीधे तौर पर देश के स्वास्थ्य तंत्र और समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
“यूपी से दिल्ली तक… सिर्फ पेपर लीक का राज”
केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जिला अध्यक्ष संजय शर्मा और सुरेश शाह ने एक साझा बयान जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक, भाजपा के शासनकाल में पेपर लीक एक लाइलाज बीमारी बन चुका है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि देश की हर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही माफियाओं के पास और बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध हो जाता है?
छात्र नेताओं ने साफ कहा कि एक तरफ देश का युवा पहले से ही भीषण बेरोजगारी और कमरतोड़ महंगाई की मार झेल रहा है, और दूसरी तरफ जब वे अपनी योग्यता साबित करने निकलते हैं, तो सिस्टम का भ्रष्टाचार उनके सपनों को कुचल देता है। झामुमो ने मांग की है कि केंद्र सरकार तुरंत इस मामले के मुख्य दोषियों को सलाखों के पीछे भेजे और भविष्य के लिए एक अभेद्य, सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली तैयार करे।

