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रामलला के दरबार में राष्ट्रपति मुर्मू: नवरात्रि पर अयोध्या में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, सीएम योगी रहे साथ

Ayodhya: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या आज एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह करीब 10:30 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया। एयरपोर्ट से निकलते

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Ayodhya: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या आज एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह करीब 10:30 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया। एयरपोर्ट से निकलते ही राष्ट्रपति ने जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार से रामनगरी में प्रवेश किया, जहां सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने जय श्रीराम के उद्घोष से उनका अभिनंदन किया।

राम दरबार में ‘श्रीराम यंत्र’ की गूंज

राम मंदिर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान रामलला की मनमोहक मूर्ति के दर्शन किए। इसके बाद वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंदिर के दूसरे तल पर पहुंचीं। वहां उन्होंने वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में पूरी श्रद्धा के साथ ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना की। राष्ट्रपति ने करीब आधे घंटे तक चले इस विशेष अनुष्ठान में भाग लिया और प्रभु की आरती उतारी। मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें मंदिर निर्माण की बारीकियों और पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मथुरा के लिए प्रस्थान और संत समागम

अयोध्या में करीब चार घंटे बिताने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू दोपहर 3 बजे कान्हा की नगरी मथुरा के लिए रवाना हो गईं। मथुरा प्रवास के दौरान वे विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी। राष्ट्रपति के इस दौरे का सबसे खास हिस्सा कल यानी 20 मार्च को होगा, जब वे राधा रानी के परम भक्त और सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से भेंट करेंगी। इस मुलाकात को लेकर ब्रजवासियों में भारी उत्साह है।

सुरक्षा के कड़े पहरे में रामनगरी

राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए अयोध्या से लेकर मथुरा तक सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य रही। ड्रोन कैमरों और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद दिखा। नवरात्रि के शुभ मुहूर्त में राष्ट्रपति का यह धार्मिक प्रवास श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

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