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बंगाल में चुनाव आयोग का ‘हंटर’: मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए, 40 अफसरों पर गिरी गाज

Kolkata: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल फूंकते ही दिल्ली से आए एक आदेश ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव का हवाला देते हुए राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को

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Kolkata: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल फूंकते ही दिल्ली से आए एक आदेश ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव का हवाला देते हुए राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कदम राज्य के इतिहास में विरला माना जा रहा है। आयोग ने इनकी जगह दुश्मंता नरिवाला को नया मुख्य सचिव और संगमित्रा घोष को गृह सचिव नियुक्त किया है।

पुलिस महकमे में ‘महा-तबादला’

आयोग की कार्रवाई केवल सचिवालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिस महकमे की चूलें भी हिला दी गई हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), कानून-व्यवस्था के महानिदेशक और दक्षिण-उत्तर बंगाल के बड़े अधिकारियों को बदल दिया गया है। बैरकपुर, हावड़ा, आसनसोल और चंदननगर जैसे ‘सेंसिटिव’ इलाकों के पुलिस आयुक्तों (CP) का भी तबादला कर दिया गया है। इतना ही नहीं, कूचबिहार, बीरभूम और मालदा समेत 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को हटाकर नए चेहरों को कमान सौंपी गई है। साथ ही 15 आईपीएस अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर दूसरे राज्यों में भेज दिया गया है।

ममता बनर्जी का पलटवार: ‘बीजेपी का खेल’

चुनाव आयोग के इस ‘मेगा एक्शन’ पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है और यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। ममता ने सवाल उठाया कि आखिर चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों को बदलने का क्या औचित्य है? दूसरी ओर, बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बंगाल में भयमुक्त चुनाव कराने के लिए प्रशासन का निष्पक्ष होना अनिवार्य था।

आयोग का पक्ष: ‘भयमुक्त चुनाव ही लक्ष्य’

इन तमाम राजनीतिक आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है। आयोग का कहना है कि उसका एकमात्र उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के तबादले प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किए गए हैं ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे। बंगाल की इस बदली हुई प्रशासनिक तस्वीर का असर आने वाले दिनों में चुनावी रैलियों और वोटिंग पैटर्न पर साफ दिखाई दे सकता है।

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