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प्यासा खेत, मजबूर किसान : बरही विधायक ने सदन में उठाया पलायन का मुद्दा

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बरही विधायक मनोज यादव ने राज्य की जर्जर सिंचाई व्यवस्था पर सरकार को आईना दिखाया। गुरुवार को जल संसाधन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर सिंचाई के अभाव को पलायन की

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बरही विधायक मनोज यादव ने राज्य की जर्जर सिंचाई व्यवस्था पर सरकार को आईना दिखाया। गुरुवार को जल संसाधन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर सिंचाई के अभाव को पलायन की सबसे बड़ी वजह बताया।

विधायक ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति पठारी और वन क्षेत्र वाली है, जहाँ खेती पूरी तरह मॉनसून के भरोसे रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि तिलैया डैम जैसा विशाल जल स्रोत होने के बावजूद बरही और आस-पास के क्षेत्रों के किसान आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई सुविधा न मिलने के कारण किसान अपनी जमीन छोड़ने और दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।

सदन में उन्होंने कई लंबित योजनाओं की लंबी फेहरिस्त गिनाई:

  • बरकठा पाइपलाइन योजना: वर्षों से लंबित होने के कारण जनता में भारी रोष है।

  • लोटिया जलाशय: जलाशय के गेट टूटे होने से पानी का संरक्षण नहीं हो पा रहा है।

  • बक्सा डैम: वन विभाग की एनओसी (NOC) न मिलने के कारण नहर निर्माण का काम अधर में लटका है।

मनोज यादव ने सरकार को सुझाव दिया कि झारखंड जैसे पहाड़ी इलाके में लिफ्ट सिंचाई (Lift Irrigation) ही एकमात्र स्थायी समाधान है। उन्होंने छोटे-बड़े तालाबों के जीर्णोद्धार और गहरीकरण की मांग की, ताकि बारिश का पानी रोका जा सके। विधायक ने जोर देकर कहा कि जब तक सिंचाई योजनाओं को फाइलों से निकालकर जमीन पर नहीं उतारा जाएगा, तब तक किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव नहीं है।

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