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होर्मुज में महासंग्राम! ईरान ने सुसाइड ड्रोन से अमेरिकी जहाज को फूंका

Tehran, (Iran): ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल का ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के बाद से पूरा पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है। दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन मानी जाने वाली होर्मुज की जलडमरूमध्य अब भीषण जंग का मैदान बन चुकी

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Tehran, (Iran): ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल का ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के बाद से पूरा पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है। दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन मानी जाने वाली होर्मुज की जलडमरूमध्य अब भीषण जंग का मैदान बन चुकी है। इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ईरान इस सामरिक रास्ते को पूरी तरह चोकहोल्ड करके बैठा है और यहां से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार हमले कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को दावा किया कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक और बड़े जहाज को निशाना बनाया है। इस बार निशाने पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा तेल टैंकर था। ईरान का सीधा आरोप है कि यह टैंकर असल में ‘आतंकवादी अमेरिका’ की संपत्ति है। इस हमले के लिए एक घातक सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिसने फारस की खाड़ी के बीचों-बीच जहाज से टकराकर जोरदार धमाका किया। यह हमला उस समय हुआ है जब अमेरिका और इजराइल ने तेहरान के तेल ठिकानों पर बमबारी काफी तेज कर दी है।

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दुनिया का करीब 25 फीसदी समुद्री तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान पिछले 8 दिनों से इस समुद्री रास्ते पर अपना पूरा कंट्रोल होने का दावा ठोक रहा है। आईआरजीसी ने दोटूक चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को यहां से सुरक्षित गुजरने नहीं दिया जाएगा। पिछले कुछ दिनों में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं, जिसकी वजह से दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजना बंद कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने ईरान से बिना शर्त सरेंडर करने की मांग की है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अब बातचीत का समय निकल चुका है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका का यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। ईरान अब हार मानने के बजाय पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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