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अमेरिका की अल्जीरिया को खुली धमकी, लेकिन भारत की बढ़ गई टेंशन!

Washington, (US): अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाज़ार में रूस और अमेरिका के बीच मची होड़ अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका ने अफ्रीकी देश अल्जीरिया को रूस से अत्याधुनिक Su-57 (सुखोई-57) फाइटर जेट खरीदने पर कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। इस धमकी

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Washington, (US): अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाज़ार में रूस और अमेरिका के बीच मची होड़ अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका ने अफ्रीकी देश अल्जीरिया को रूस से अत्याधुनिक Su-57 (सुखोई-57) फाइटर जेट खरीदने पर कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। इस धमकी का असर केवल अल्जीरिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने नई दिल्ली के गलियारों में भी बेचैनी बढ़ा दी है।

अमरीकी ‘CAATSA’ का डर अमेरिकी ब्यूरो ऑफ ईस्टर्न अफेयर्स के प्रमुख रॉबर्ट पैलाडिनो ने सीनेट कमेटी के सामने स्पष्ट किया कि यदि अल्जीरिया रूस के साथ इस सौदे पर आगे बढ़ता है, तो उस पर ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट’ (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रूस से सैन्य उपकरणों की खरीद अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

भारत के लिए क्यों है यह ‘बड़ी टेंशन’? भारत दशकों से रूसी हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के विमानों से लैस करना चाहती है, और इस रेस में रूस का Su-57 सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

अल्जीरिया पर अमेरिका का यह सख्त रुख भारत के लिए एक कड़ा संदेश है। यदि भारत इस रूसी ‘फेलॉन’ जेट को खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो अमेरिका के साथ सुधरते रिश्तों और रक्षा समझौतों पर ग्रहण लग सकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका इस डील के जरिए भारत को रूसी खेमे से दूर कर अपने F-35 या अन्य विमानों की ओर खींचना चाहता है।

Su-57: क्यों है यह जेट इतना खास?

  • पांचवीं पीढ़ी का विमान: इसे रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जो रडार की पकड़ में नहीं आता (Stealth)।

  • वैश्विक चुनौती: इसने अमेरिका के F-22 और चीन के J-20 को कड़ी टक्कर दी है।

  • अल्जीरिया है पहला ग्राहक: अल्जीरिया ने पिछले साल ही इसकी पुष्टि की थी और उनके पायलट फिलहाल रूस में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

अब दुनिया की नजरें भारत पर हैं कि क्या वह अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अपनी वायुसेना के लिए रूसी ‘सुखोई’ को चुनेगा या फिर कूटनीतिक दबाव में कोई नया रास्ता तलाशेगा।

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