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बाबा ग्रुप पर आयकर का शिकंजा, 10 करोड़ के जेवरात और 5 करोड़ नकद जब्त

रांची : झारखंड की राजधानी रांची में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से बाबा ग्रुप के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई अब एक बड़े वित्तीय खुलासे की ओर बढ़ रही है। विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा गत 29 जनवरी से शुरू की गई

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रांची : झारखंड की राजधानी रांची में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से बाबा ग्रुप के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई अब एक बड़े वित्तीय खुलासे की ओर बढ़ रही है। विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा गत 29 जनवरी से शुरू की गई यह छापेमारी रविवार को चौथे दिन भी जारी रही। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

बड़ी बरामदगी : नकद और जेवरात का अंबार

जांच के दौरान आयकर विभाग ने बाबा ग्रुप से जुड़े विभिन्न ठिकानों से अब तक 10 करोड़ रुपये के जेवरात जब्त किए हैं। यही नहीं, छापेमारी के तीसरे दिन तक जब्त की गई नकद राशि 4.50 करोड़ रुपये थी, जिसमें चौथे दिन 50 लाख रुपये का और इजाफा हुआ। इसके साथ ही अब तक कुल 5 करोड़ रुपये की नकदी आधिकारिक रूप से जब्त की जा चुकी है। विभाग इन बरामद रुपयों और गहनों के वैध स्रोतों की बारीकी से जांच कर रहा है।

संपत्तियों के मूल्यांकन में बड़ा हेरफेर

इस छापेमारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बाबा ग्रुप की अचल संपत्तियों का मूल्यांकन है। आयकर विभाग ने ग्रुप की 10 प्रमुख संपत्तियों की जांच शुरू की थी। प्राथमिक जांच में यह पाया गया है कि बाबा ग्रुप ने अपने ‘बुक्स ऑफ अकाउंट्स’ में संपत्तियों की जो कीमत दिखाई है और उनकी जो वास्तविक बाजार कीमत है, उसमें 25 करोड़ रुपये का भारी अंतर है।

सूत्रों का कहना है कि कागजों पर संपत्तियों का मूल्य वास्तविक कीमत से लगभग पांच गुना कम दिखाया गया था। यह सीधे तौर पर टैक्स चोरी और अपनी वास्तविक आमदनी को छिपाने का प्रयास माना जा रहा है। वर्तमान में विभाग द्वारा संपत्तियों के मूल्यांकन और फॉरेंसिक अकाउंटिंग सिस्टम के जरिए खरीद-बिक्री के डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहन पड़ताल की जा रही है।

45 ठिकानों पर एक साथ दबिश

उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई 29 जनवरी को शुरू हुई थी, जिसमें बाबा एग्रो, बाबा फूड प्रोसेसिंग और उनसे जुड़े चावल के बड़े आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) के कुल 45 ठिकानों को निशाने पर लिया गया। वर्ष 2026 में आयकर विभाग की ओर से झारखंड में की गई यह पहली और सबसे बड़ी छापेमारी है।

विभाग को संदेह है कि व्यापारियों द्वारा कच्चे लेनदेन और वास्तविक आय को छिपाकर बड़े पैमाने पर कर चोरी की गई है। छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल, बाबा ग्रुप के संचालकों और उनसे जुड़े व्यवसायियों से पूछताछ का सिलसिला जारी है।

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