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ट्रंप का सीधा हमला: डर से नहीं, सम्मान से चलता है देश; ईरान को चाहिए नई लीडरशिप

World News: ईरान में गहराते राजनीतिक संकट और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सत्ता पर बड़ा हमला बोला है। ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दशकों पुराने शासन को खत्म

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World News: ईरान में गहराते राजनीतिक संकट और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सत्ता पर बड़ा हमला बोला है। ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दशकों पुराने शासन को खत्म करने की खुली मांग करते हुए कहा कि अब ईरान को नई लीडरशिप की जरूरत है।

ट्रंप ने कहा कि ईरान में चल रहे जन आंदोलन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि बदलाव की पुकार हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक दमन, आर्थिक बदहाली और मानवाधिकार उल्लंघनों ने ईरानी जनता का गुस्सा सड़कों पर ला दिया है। ऐसे हालात में मौजूदा नेतृत्व का बने रहना देश को और अंधेरे में ले जाएगा।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने खामेनेई पर आरोप लगाया कि उनका शासन डर और हिंसा के सहारे टिका हुआ है। फांसी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान का “सबसे अच्छा फैसला” यह रहा कि हाल ही में दो दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों को फांसी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सत्ता बचाने के लिए लोगों की जान लेना किसी भी तरह से नेतृत्व नहीं हो सकता।

ट्रंप ने कहा कि चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों, एक सच्चा नेता अपने देश को सुधारने पर ध्यान देता है, न कि विरोध की आवाज दबाने के लिए मौत का सहारा लेता है। उन्होंने अपने उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि नेतृत्व सम्मान से आता है, डर और लाशों से नहीं।

इस दौरान ट्रंप ने खामेनेई को “बीमार सोच वाला व्यक्ति” बताते हुए कहा कि ईरान की बदहाली उसकी मौजूदा लीडरशिप का नतीजा है। उनके मुताबिक आज ईरान दुनिया के उन देशों में गिना जाने लगा है, जहां लोग सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं।

खामेनेई का पलटवार

ट्रंप के बयान से पहले खामेनेई ने भी अमेरिका और इजराइल पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका और इजराइल को एक बार फिर मात दी है और उस “बगावत” को कुचल दिया है, जिसे वाशिंगटन और तेल अवीव ने हवा दी थी।

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खामेनेई ने ट्रंप को अपराधी बताते हुए कहा कि हालिया दंगों, हत्याओं और तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं। उनका आरोप था कि ट्रंप ने खुले तौर पर बयान देकर और सैन्य समर्थन का वादा करके दंगाइयों को प्रोत्साहित किया।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश के भीतर और बाहर अशांति फैलाने वालों को सजा देने से पीछे भी नहीं हटेगा। दोनों नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।

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