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हजारीबाग में करोड़ों की सड़क निर्माण में धांधली, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

Hazaribagh News: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ईचाक प्रखंड के परासी से खैरा गांव तक करीब 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा

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Hazaribagh News: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ईचाक प्रखंड के परासी से खैरा गांव तक करीब 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। लोगों का आरोप है कि सड़क का काम बेहद घटिया स्तर पर हो रहा है और संवेदक पूरी तरह मनमानी कर रहा है।

करोड़ों खर्च फिर भी सड़क अधूरी

ग्रामीणों का कहना है कि ठोस नींव तैयार करने के बजाय कच्ची मिट्टी पर ही सीधे बिटुमिन बिछाया जा रहा है। इससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुखिया प्रतिनिधि दयानंद कुमार ने बताया कि यह सड़क दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र मार्ग है और इसके लिए ग्रामीणों ने वर्षों तक संघर्ष किया था। लेकिन अब जिस तरह का काम हो रहा है, वह बेहद निराशाजनक है।

मशीन तक धंसी

निर्माण की हालत इतनी खराब है कि सड़क निर्माण के दौरान ही पेवर फिनिशर मशीन सड़क में धंस गई। ग्रामीण तिलेश्वर प्रजापति ने कहा कि अधूरे और लापरवाह निर्माण की वजह से कई बार सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत हजारीबाग उपायुक्त से की है और आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों ने किया विरोध

विरोध के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे, जिनमें दयानंद कुमार, प्रदीप महतो, संदीप कुमार, राजकुमार, सुनील शर्मा, अनुज गिरी, राजेश कुमार, सचिन कुमार, अजीत गिरी, लखिया देवी, पनवा देवी, शांति देवी, मंजू देवी और बबिता कुमारी शामिल थे। सभी ने एक सुर में घटिया निर्माण रोकने और जांच की मांग उठाई।

इस मामले पर जब निर्माण कंपनी के रोड मैनेजर संजय मेहता से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कच्ची मिट्टी की वजह से परेशानी आ रही है, जिसे जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि ग्रामीण कार्य विभाग के जेई घनश्याम साव ने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद अगर सड़क टिकाऊ और सुरक्षित नहीं बन पाई, तो इसका सीधा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ेगा। उनका साफ कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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