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अब जन्म प्रमाण पत्र से नहीं बनेगा बच्चों का आधार कार्ड, जानिए नया नियम

India News: आधार कार्ड आज हर भारतीय नागरिक की जिंदगी का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता खुलवाने से लेकर बच्चों के स्कूल एडमिशन तक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से लेकर पहचान साबित करने तक, हर जगह आधार की जरूरत होती

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India News: आधार कार्ड आज हर भारतीय नागरिक की जिंदगी का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता खुलवाने से लेकर बच्चों के स्कूल एडमिशन तक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से लेकर पहचान साबित करने तक, हर जगह आधार की जरूरत होती है। अब बच्चों के आधार कार्ड से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है।

क्या बदला है नियम?

पहले तक बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र ही पर्याप्त होता था। यानी अगर बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध है, तो उसी के आधार पर आधार कार्ड जारी कर दिया जाता था। लेकिन अब भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नियमों में संशोधन कर दिया है। नए नियम के अनुसार अब केवल जन्म प्रमाण पत्र से बच्चों का आधार नहीं बनेगा। इसके लिए माता-पिता के पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे।

क्यों जरूरी किए गए माता-पिता के दस्तावेज?

UIDAI का कहना है कि यह बदलाव आधार प्रक्रिया को और मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है। नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि बच्चे की पहचान सही है और उसका रिकॉर्ड सरकारी डाटाबेस में सुरक्षित तरीके से दर्ज हो। अब बच्चे का आधार कार्ड उसके माता या पिता के आधार और पहचान से लिंक होगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी?

नए नियम के तहत बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए माता या पिता के पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी है। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या घर का बिजली बिल शामिल है। इसके अलावा बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र भी देना अनिवार्य है, जिसमें नाम और जन्मतिथि साफ-साफ दर्ज होनी चाहिए।

ब्लू आधार क्या है?

5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जारी किए जाने वाले आधार को “ब्लू आधार” कहा जाता है। इसमें बच्चों की बायोमेट्रिक जानकारी नहीं ली जाती। सिर्फ फोटो और माता-पिता के दस्तावेज के आधार पर कार्ड जारी किया जाता है। जैसे ही बच्चा 5 साल का होता है, उसके आधार में बायोमेट्रिक अपडेट कराना जरूरी होता है। इसमें बच्चे की उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) और आंखों का स्कैन (आईरिस) लिया जाता है।

15 साल में दोबारा होगा अपडेट

UIDAI के नियम के मुताबिक, बच्चे का आधार 15 साल की उम्र में दोबारा अपडेट कराना अनिवार्य है। इस दौरान बच्चे की पूरी बायोमेट्रिक जानकारी फिर से ली जाती है। इसका मकसद यह है कि बच्चे का रिकॉर्ड भविष्य में भी सही और प्रमाणिक बना रहे।

लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इस बदलाव से अब माता-पिता को बच्चों का आधार बनवाने में थोड़ी अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। अगर माता-पिता के दस्तावेज अपडेटेड नहीं हैं या पता बदल चुका है, तो पहले उन्हें सुधार करवाना होगा। तभी बच्चे का आधार बन पाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जरूरी था क्योंकि पहले केवल जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बने आधार कार्ड में गलतियों और डुप्लीकेट की संभावना ज्यादा रहती थी।

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