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शिक्षक विहीन राजकीयकृत उच्च विद्यालय आसनबनी, बच्चों का भविष्य अंधकार में

Bokaro News: शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुए सालों बीत गए, लेकिन झारखंड के कई ग्रामीण स्कूल आज भी बदहाली के शिकार हैं। चन्दनकियारी प्रखण्ड का राजकीयकृत उच्च विद्यालय, आसनबनी इसका ताजा उदाहरण है। यहां एक सहायक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से अब

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Bokaro News: शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुए सालों बीत गए, लेकिन झारखंड के कई ग्रामीण स्कूल आज भी बदहाली के शिकार हैं। चन्दनकियारी प्रखण्ड का राजकीयकृत उच्च विद्यालय, आसनबनी इसका ताजा उदाहरण है। यहां एक सहायक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से अब तक कोई नया शिक्षक नहीं मिला है। नतीजा यह कि विद्यालय बिना शिक्षक के ही चल रहा है और छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। बार-बार मांग और आवेदन देने के बावजूद अब तक शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई। स्थिति यह है कि नौवीं और दसवीं के छात्र नामांकित तो हैं, लेकिन पढ़ाई कराने वाला शिक्षक ही नहीं है।

नेताओं ने उठाई आवाज़

इस गंभीर मुद्दे को लेकर जेएलकेएम नेता अंकित कुम्भकार ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, बोकारो कार्यालय में एक जन-आवेदन सौंपा। आवेदन में स्पष्ट कहा गया कि तत्काल शिक्षक की नियुक्ति की जाए, ताकि पढ़ाई फिर से शुरू हो सके। चूंकि पदाधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं थे, इसलिए यह आवेदन प्रभारी अधिकारी को सौंपा गया।

किसान नेता और चन्दनकियारी के पूर्व प्रत्याशी जगन्नाथ रजवार ने भी इस मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो से उत्क्रमित मध्य विद्यालय, आसनबनी को उच्च विद्यालय में अपग्रेड कराने की मांग रखी गई थी। मांग को मंजूरी भी मिली और तभी से यहां नौवीं और दसवीं की कक्षाएं शुरू हुईं। लेकिन आज तक शिक्षक की कमी दूर नहीं हुई।

प्राथमिक विद्यालय की हालत भी बदतर

आसनबनी कुम्हार टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय का हाल भी किसी से छुपा नहीं है। यहां सिर्फ एक ही पारा-शिक्षक पूरे विद्यालय को चला रहे हैं। नतीजा यह कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रतिनिधि सब आंख मूंदकर बैठे हैं।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

इस समस्या को लेकर ग्रामीण अब आंदोलन के मूड में हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व जनप्रतिनिधियों की होगी।

सामूहिक हस्ताक्षरित आवेदन

ग्रामीणों ने एकजुट होकर आवेदन दिया है। आवेदन पर अंकित कुम्भकार, जगन्नाथ रजवार, युधिष्ठिर टुडू, गौरांग कुम्भकार, विश्वनाथ कुम्भकार, धिरेन बाउरी, शिबू कुम्भकार, गौतम कुमार, संजय रजवार, सुदाम कुमार गोस्वामी, आलम अंसारी, रंजीत कुम्भकार, उत्तम कुमार बाउरी, मनोज टुडू, सुन्दर लाल कुम्भकार, युधिष्ठिर महाथा, भवानी महतो, बब्लु कुम्भकार, राजीव रजवार, असीम गोस्वामी, सुनिल कुम्भकार, नुनाराम बाउरी और नरेश रजवार समेत कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार लगातार गुणवत्ता शिक्षा की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। बिना शिक्षक के स्कूल चलाना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो मजबूरन आंदोलन ही रास्ता होगा।

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