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झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड क्यों बना सबसे फिसड्डी? CEO पर उठे गंभीर सवाल

Ranchi News : जहां देश के अन्य राज्य अपने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को डिजिटाइज करके पारदर्शिता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहीं झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड एक शर्मनाक स्थिति में पहुंच गया है। वर्ष 2025 तक भी इस बोर्ड ने

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Ranchi News : जहां देश के अन्य राज्य अपने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को डिजिटाइज करके पारदर्शिता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहीं झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड एक शर्मनाक स्थिति में पहुंच गया है। वर्ष 2025 तक भी इस बोर्ड ने महज 13 संपत्तियों को ही डिजिटाइज किया है, जो कि किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे कम है। वक्फ बोर्डों का मूल उद्देश्य मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों का संरक्षण, प्रबंधन और बेहतर उपयोग है। लेकिन झारखंड में इस संस्था का बुनियादी संचालन ही ठप पड़ा हुआ है। इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक उपेक्षा और नेतृत्व की विफलता जैसी गंभीर समस्याएं हैं।

झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड एक ऐसा उदाहरण बन गया है जहां सरकारी उपेक्षा, प्रशासनिक ढीलापन और नेतृत्वहीनता ने मिलकर संस्थागत विफलता को जन्म दिया है। यदि अब भी इस बोर्ड की संरचना, संचालन और उद्देश्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में मुस्लिम समाज की वक्फ संपत्तियां पूरी तरह से खतरे में पड़ जायेंगी। 

चल संपत्तियों में शून्य, रजिस्ट्रेशन अधूरा

केंद्र सरकार के डेटा के अनुसार झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कुल अचल संपत्तियां 698, रजिस्टर्ड संपत्तियां 260, चल संपत्तियां 4 एवं डिजिटाइज्ड संपत्तियां केवल 13 हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड पूरे देश में डिजिटल पारदर्शिता की रेस में सबसे पीछे है। जहां तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यूपी और बंगाल जैसे राज्यों ने हजारों संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड बना लिया है, वहीं झारखंड में आज भी प्रक्रिया सिर्फ हवा-हवाई तक सीमित है। 

बोर्ड की निष्क्रियता – न बैठक, न निर्णय

जानकारों का कहना है कि झारखंड में वक्फ बोर्ड की बैठकें नियमित रूप से नहीं होतीं। बोर्ड गठन के बावजूद निर्णय लेने वाले सदस्यों की भूमिका सीमित रही है। प्रशासन की ओर से भी कोई दिशा-निर्देश या मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। बोर्ड कार्यालय खुलते तो हैं लेकिन काम कुछ नहीं हाेता, लोग बोर्ड कार्यालय आकर बेरंग लौट जाते हैं।

CEO की भूमिका सवालों के घेरे में

झारखंड राज्य वक्फ बोर्ड के CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) मुमताज अली पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और वक्फ से जुड़े ट्रस्टीज का कहना है कि CEO नियमित रूप से कार्यालय नहीं आते। उनके पास वक्फ बोर्ड का डुअल प्रभार है, इसलिए वे बोर्ड के कार्यों को प्राथमिकता नहीं देते। सीईओ न तो लोगों से मिलते हैं, न ही कॉल उठाते हैं। वक्फ कार्यालय में आने वाले लोग घंटों इंतजार के बाद लौट जाते हैं। जनता में उनके प्रति असंतोष और आक्रोश इतना बढ़ गया है कि जल्द ही उनके ख़िलाफ धरना प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। इस बात की जांच के लिए हमने उनके मोबाईल नंबर 8757252665 पर कॉल किया, उन्होंने कॉल रिसिव नहीं किया। इसके बाद उनके मोबाईल नंबर पर संदेश भी भेजा गया बावजूद उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। इससे स्पष्ट है कि बोर्ड के मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध है और उन पर लग रहा आरोप कहीं न कहीं सच की ओर इशारा कर रहा है।

सरकारी उदासीनता मुख्य कारण

राज्य सरकार की ओर से वक्फ बोर्ड को लेकर न तो गंभीरता दिखाई गई है और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई है। बोर्ड की फंडिंग सीमित है और तकनीकी संसाधनों की कमी है। बोर्ड के कर्मचारी वर्षों से स्थायी नहीं किए गए हैं। डिजिटलकरण के लिए कोई विशेष टीम नियुक्त नहीं की गई। बजट पारदर्शिता का भी अभाव है, जिससे धन का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। 

स्थानीय मुस्लिम समाज में रोष

रांची, जमशेदपुर, धनबाद, गिरिडीह जैसे जिलों में कई वक्फ संपत्तियां हैं जो या तो कब्जे में हैं या उपयोग नहीं हो रही हैं। स्थानीय मुस्लिम संगठनों ने हाल ही में एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया है जिसमें कहा गया है कि “अगर बोर्ड की स्थिति नहीं सुधरी, तो सामूहिक आंदोलन किया जाएगा। बोर्ड की निष्क्रियता से गरीबों और धार्मिक संस्थानों को नुकसान हो रहा है। हम CEO के इस्तीफे की मांग करेंगे अगर वह पद की जिम्मेदारी नहीं निभाते।”

संपत्तियों पर अतिक्रमण का खतरा

डिजिटल रिकॉर्डिंग के अभाव में कई वक्फ संपत्तियां अतिक्रमण का शिकार हो रही हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज से कोर्ट केस की संख्या बढ़ रही है। किरायेदारों से कोई नियमित आय नहीं हो रही। जो जितना लूट और गबन करने सक रहा है, कर रहा है। ऐसे लोगों को रोकने या उन पर कार्रवाई करने में झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड पूरी तरह मृतप्राय: है।

क्या हो सकते हैं समाधान

  • स्वतंत्र डिजिटल ऑडिट-सभी संपत्तियों की डिजिटाइजेशन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  • बोर्ड का पुनर्गठन-सक्रिय सदस्यों को शामिल करके नए सिरे से बोर्ड का गठन किया जाए।
  • स्थायी CEO की नियुक्ति-ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया जाए जो पूर्णकालिक रूप से जिम्मेदारी निभा सके।
  • जनसुनवाई तंत्र लागू हो-जनता की शिकायतों पर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो।
  • संपत्ति पुनर्विकास योजना-अनुपयोगी संपत्तियों को स्कूल, हॉस्पिटल, हॉस्टल आदि में बदला जाए।

अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड की स्थिति

क्रमांकराज्य/वक्फ बोर्डवक्फ संप​त्तिअचल संप​त्तिचल संप​त्तिडिजिटाइज्ड रिकॉर्ड
1अंडमान और निकोबार वक्फ बोर्ड99151084
2आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड356814685853546
3असम वक्फ बोर्ड1561265401554
4बिहार राज्य (शिया) वक्फ बोर्ड3071750162651
5बिहार राज्य (सुन्नी) वक्फ बोर्ड2812689018287
6चंडीगढ़ वक्फ बोर्ड33340794
7छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड8004230033
8दादरा और नगर हवेली वक्फ बोर्ड283011964
9दिल्ली वक्फ बोर्ड19641047028
10गुजरात राज्य वक्फ बोर्ड1170239940541811683
11हरियाणा वक्फ बोर्ड12642232690740
12हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड12875343012560
13जम्मू और कश्मीर औकाफ बोर्ड19291325330144
14झारखंड राज्य (सुन्नी) वक्फ बोर्ड260698413
15कर्नाटक राज्य औकाफ बोर्ड3314762830180132844
16केरल राज्य वक्फ बोर्ड1148553395011203
17लक्षद्वीप राज्य वक्फ बोर्ड3428960341
18मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड15054335322409387
19महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड114923670113143
20मणिपुर राज्य वक्फ बोर्ड97710070933
21मेघालय राज्य वक्फ बोर्ड43585114960
22ओडिशा वक्फ बोर्ड437910314263773
23पुडुचेरी राज्य वक्फ बोर्ड4569325424555
24पंजाब वक्फ बोर्ड2540375965045
25राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड1894830895018946
26तमिलनाडु वक्फ बोर्ड74546609286057454
27तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड321584568201899
28त्रिपुरा वक्फ बोर्ड189928146232157
29उत्तर प्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड31021538602071
30उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड1248662171613123233
31उत्तराखंड वक्फ बोर्ड2146538803102
32पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड71028092216981
कुल संप​त्ति

35639687298516716330008

इस तालिका से स्पष्ट है कि झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड लगभग हर मानक पर सबसे नीचे है।

रमजान कुरैशी

रमजान कुरैशी, समाजसेवी, रांची

वक्फ बोर्ड का कार्य शुन्य है, इधर वक्फ संप​त्ति लूटी जा रही है। लोग सीईओ से मिलने की आस में बोर्ड कार्यालय आते हैं लेकिन सीईओ मिलते ही नहीं। वह दूसरे कार्यालय में आते हैं और बोर्ड के कार्य के प्रति उदासीन हैं। इससे आम लोगों में उनके प्रति रोष है। यह कार्य प्रणाली बदलनी होगी। इससे वक्फ संप​त्तियाें का सही देखभाल और उपयोग असंभव है।

महफूज आलम, समाजसेवी, रांची

महफूज आलम

बोर्ड गठन के बाद से ही इस पर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखलाई। यही कारण है कि बोर्ड सफेद हाथी की भूमिका में है। सरकार चाहे तो इसकी संप​त्तियों का सही दिशा में बोर्ड के माध्यम से उपयोग कर सकती है और गरीबाें का कल्याण कर सकती है। 

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