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93 साल की उम्र में जेल से घर लौटेंगे रामबृक्ष! गांधी जयंती पर 44 बंदियों की होगी रिहाई

बिहार सरकार ने गांधी जयंती पर मानवीय आधार पर विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों को रिहा करने का फैसला किया है। इनमें 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी सहित कई बुजुर्ग और बीमार बंदी शामिल हैं।

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Patna: गांधी जयंती के पावन अवसर पर बिहार सरकार ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए राज्य की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों को समय पूर्व रिहा करने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व वर्ष 2018 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 43 कैदियों को कारागार से मुक्त किया गया था। अब करीब आठ साल के अंतराल के बाद राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा पर बुजुर्ग, लाचार और गंभीर रोगों से ग्रसित बंदियों को सामाजिक पुनर्वास का अवसर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार 2 अक्टूबर को अपराध पीड़ित 1,820 परिवारों के बीच करीब 3 करोड़ 86 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि भी वितरित करेगी।

90 वर्ष से अधिक उम्र के दो कैदियों को मिली राहत

इस बार रिहा होने वाले अधिकांश बंदी वे हैं जो अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं और जिन्होंने कारागार में एक लंबी अवधि की सजा पूरी कर ली है। जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, रिहा होने वालों में 2 बंदी 90 वर्ष से अधिक आयु के हैं। वहीं, 8 कैदी 80 वर्ष से अधिक और 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। कारामुक्त होने वाले बंदियों में एक महिला कैदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्षों की लंबी सजा काटी है।

93 साल के रामबृक्ष कोइरी लौटेंगे अपने घर

रिहा किए जाने वाले प्रमुख बंदियों में रोहतास जेल में बंद 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी शामिल हैं, जो इस उम्र में अपने परिवार के बीच लौट सकेंगे। इनके अलावा मधेपुरा से योगेश्वर यादव, 84 वर्षीय हरिवंश राम और 82 वर्षीय रामाशीष यादव को भी कारागार से मुक्ति मिलेगी। वहीं, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता को मानवीय आधार पर सजा से छूट दी गई है। यह सभी बंदी लंबे समय तक कारावास की यातनाएं झेल चुके हैं और शारीरिक रूप से बेहद दुर्बल हैं।

पुनर्वास और पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल

राज्य सरकार का यह कदम वृद्ध और लाचार कैदियों को अपने जीवन के अंतिम वर्षों में परिवार और समाज के साथ रहने का मौका देगा। इसके साथ ही न्याय की संतुलन नीति के तहत सरकार ने अपराध से प्रभावित परिवारों को भी नहीं भुलाया है। 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में 1,820 पीड़ित परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी, जिससे उन्हें आजीविका और पुनर्वास में संबल मिल सके।

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