गुमला: सदर अस्पताल गुमला में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। इलाज के लिए पहुंचे एक बच्चे को दस्त की दवा के स्थान पर कथित रूप से कैल्शियम की एक्सपायरी दवा दिए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, गुमला निवासी गौतम साहू अपने भतीजे ऋतिक साहू को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने पर इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा पर्चे पर आवश्यक दवाइयां लिखे जाने के बाद जब वे दवा काउंटर पहुंचे, तो वहां मौजूद कर्मियों ने डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा के बजाय दूसरी दवा उन्हें सौंप दी। गौतम साहू का कहना है कि बच्चे को दस्त नियंत्रित करने वाली दवा की आवश्यकता थी, लेकिन काउंटर से उन्हें कैल्शियम कार्बोनेट टैबलेट दे दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के रजिस्टर में दस्त की दवा वितरण की एंट्री की गई, जबकि वास्तविक रूप से उन्हें कैल्शियम की दवा प्रदान की गई।        अस्पताल परिसर में नाराजगी जताते हुए गौतम साहू ने कहा कि दस्त और कैल्शियम की दवा में स्पष्ट अंतर होता है। यदि बिना जांच-पड़ताल के दवा बच्चे को दे दी जाती और उसकी तबीयत बिगड़ जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दवाइयों का वितरण बिना उचित जांच के किया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, शिकायत करने पर प्रारंभिक स्तर पर अस्पताल कर्मियों ने बताया कि दवा के रंग में समानता होने के कारण गलती हुई होगी। बाद में यह भी कहा गया कि संबंधित दवा अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं थी। इस पर परिवार ने सवाल उठाया कि यदि दवा उपलब्ध नहीं थी, तो उसके वितरण की एंट्री रजिस्टर में किस आधार पर दर्ज की गई घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में इस प्रकार की लापरवाही मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकती है। अब लोगों की निगाहें अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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