India News: पांच साल से कम उम्र के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों में रोगाणुरोधी प्रतिरोधी (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट) बैक्टीरिया पाए जाने का जोखिम काफी अधिक है। विश्व स्तर पर करीब 4.5 करोड़ बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं। इन बच्चों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के चलते जानलेवा संक्रमण जैसे तपेदिक (टीबी), निमोनिया और सेप्सिस होने की आशंका अत्यधिक रहती है।

दुनिया में करीब 4.5 करोड़ बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार

यह चिंताजनक तथ्य एक नई अंतरराष्ट्रीय शोध से सामने आया है। यह शोध इनिओस ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एंटीमाइक्रोबियल रिसर्च द्वारा किया गया। अब शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ऐसे बच्चों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरिया का तेजी से प्रसार हो रहा है, जो पहले से कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा करता है। यह अध्ययन नाइजर के एक अस्पताल में गंभीर कुपोषण से ग्रस्त 1,371 बच्चों पर किया गया, जिनसे वर्ष 2016 से 2017 के बीच 3,000 से अधिक रेक्टल स्वाब नमूने लिए गए।

हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 76 फीसदी बच्चों में एक्सटेंडेड स्पेक्ट्रम बीटा लैक्टामैस जीन युक्त बैक्टीरिया पाए गए, जो अधिकांश सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर कर सकते हैं। शोध की मुख्य लेखिका डॉ. क्रिस्टी सैंड्स ने बताया, “ये इस दुनिया के सबसे कमजोर और असुरक्षित बच्चे हैं। हमारी सबसे प्रभावशाली दवाएं एंटीबायोटिक्स भी इनमें काम नहीं कर रही हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यद्यपि यह अध्ययन नाइजर में केंद्रित था, परंतु इसी तरह की स्थिति दुनिया के अन्य देशों में भी हो सकती है, विशेष रूप से वहां जहां युद्ध, जलवायु परिवर्तन और आपदाएं कुपोषण को और बढ़ा रही हैं।

अध्ययन में यह भी पता चला कि जिन बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने के समय यह बैक्टीरिया नहीं था, उनमें से 70 प्रतिशत बच्चों में अस्पताल में रहने के दौरान कार्बेपनेम रेजिस्टेंस विकसित हो गया। यह एक अत्यंत चिंताजनक स्थिति है क्योंकि कार्बेपनेम वह अंतिम एंटीबायोटिक होता है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बाकी सभी दवाएं फेल हो जाती हैं। शोधकर्ताओं ने इस संकट से निपटने के लिए संक्रमण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने, अस्पतालों की स्वच्छता प्रणाली को मजबूत करने और कुपोषण की रोकथाम के लिए वैश्विक रणनीति बनाने की तत्काल आवश्यकता बताई है।

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