घाघरा: विकास के तमाम दावों के बीच गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के सुदूरवर्ती झलकापाठ गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सड़क सुविधा के अभाव में रविवार को प्रसव पीड़ा से जूझ रही 30 वर्षीय सुकरी कुमारी को डोली पर लादकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त के निर्देश पर प्रखंड प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। मंगलवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) दिनेश कुमार झलकापाठ गांव पहुंचे और मृतका के पति जगन्नाथ कोरवा तथा अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान बीडीओ ने पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता के रूप में एक बोरा चावल और दो कंबल प्रदान किए। गांव में लगाए गए विशेष शिविर के दौरान प्रशासन ने अन्य जरूरतमंदों की समस्याओं का भी समाधान किया। शिविर में दो लाभुकों के पेंशन आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि छह ग्रामीणों का ई-केवाईसी अपडेट किया गया। बीडीओ दिनेश कुमार ने स्वास्थ्य सहियाओं को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू होने से कम से कम एक सप्ताह पूर्व अस्पताल में भर्ती कराया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि अस्पताल में ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों और युवाओं से नशापान से दूर रहने और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। इस मौके पर बीपीओ बेबी कुमारी, अशोक कुमार, सतीश बंसल सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।
घाघरा से दीनदयाल राम की रिपोर्ट



