नई दिल्ली। केंद्र सरकार मनरेगा योजना का नाम बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर “पूज्या बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी विधेयक 2025” किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हो रही है। सूत्र बताते हैं कि नया नाम ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को एक नई पहचान देगा और इसके उद्देश्यों को मजबूत करने में मदद करेगा। 2005 में कानून के रूप में पारित हुई मनरेगा योजना ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन का अकुशल मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी देती है। इसे 200 जिलों में शुरू किया गया था और बाद में पूरे देश में विस्तार दिया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा ने लाखों प्रवासी मज़दूरों को राहत देने में अहम भूमिका निभाई थी। घर के पास रोजगार उपलब्ध होने से महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। इसके अलावा, उसी कैबिनेट बैठक में विकास भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 को भी मंजूरी मिलने की संभावना है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधारों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब योजना के नाम में बदलाव का प्रस्ताव आया है। शुरुआत में यह NREGA कहलाती थी, जिसे बाद में महात्मा गांधी के नाम पर MGNREGA कर दिया गया था।
घाघरा से दीनदयाल राम की रिपोट



