रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आय से अधिक संपत्ति (DA Case) अर्जित करने के मामले में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के तत्कालीन तकनीकी अधिकारी राम विनोद सिंह को दोषी करार दिया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने दोषी अधिकारी को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी द्वारा जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उन्हें एक वर्ष की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।
भ्रष्टाचार और अकूत संपत्ति से जुड़ा यह पूरा मामला वर्ष 1983 से लेकर 2007 के बीच का है। उस लंबी अवधि के दौरान राम विनोद सिंह बीएसएनएल के हजारीबाग कार्यालय में टेलीकॉम मैकेनिकल ऑफिसर (टीएमओ) के पद पर तैनात थे। सीबीआई की जांच और तकनीकी विश्लेषण के दौरान यह कड़वा सच सामने आया कि उन्होंने अपने सेवा काल के दौरान अपने पद का दुरुपयोग किया और अपनी ज्ञात और वैध आय के स्रोतों से लगभग 34 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली थी।
इस पूरे सुनियोजित आर्थिक अपराध का खुलासा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की एक गुप्त जांच के बाद हुआ था। साक्ष्य मिलने के बाद, सीबीआई ने वर्ष 2007 में राम विनोद सिंह के खिलाफ नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विस्तृत और गहन जांच शुरू की थी। जांच प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने आरोपी अधिकारी के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी भी की थी।
सीबीआई की इस तलाशी कार्रवाई के दौरान आरोपी के परिसर से 68 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसी को उनके नाम पर दर्ज कई चल और अचल संपत्तियों से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज मिले थे। जब जांच अधिकारियों ने इन दस्तावेजों का मिलान उनकी वास्तविक और कानूनी आय के स्रोतों से किया, तो आय और संपत्ति के बीच एक बहुत बड़ी और स्पष्ट असमानता (Disproportionality) पाई गई, जिसका आरोपी अधिकारी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
अदालती सुनवाई के दौरान सीबीआई के लोक अभियोजक ने मामले को मजबूती से रखने के लिए अदालत के समक्ष कुल 65 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अभियोजन पक्ष ने अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर राम विनोद सिंह के खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह साबित कर दिया। अंततः, दोनों पक्षों की लंबी दलीलों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।



