World News: साल 2025 दुनिया के लिए मौसम की चरम घटनाओं का प्रतीक बनकर सामने आया है। कहीं रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया, तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। साल के आखिर में रूस की राजधानी मॉस्को में 146 साल का रिकॉर्ड तोड़ने वाली बर्फबारी ने यह साफ कर दिया कि धरती की जलवायु व्यवस्था में असंतुलन अब नजरअंदाज करने लायक नहीं रहा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने पुष्टि की है कि 2025 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा। संगठन के अनुसार, वैश्विक तापमान में लंबे समय से जारी बढ़ोतरी की प्रवृत्ति लगातार बनी हुई है। 2015 से 2025 तक के पिछले 11 साल रिकॉर्ड में दर्ज सबसे गर्म 11 साल साबित हुए हैं।
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डब्ल्यूएमओ के आठ वैश्विक तापमान डेटासेट के संयुक्त विश्लेषण से पता चला है कि 2025 में औसत वैश्विक सतही तापमान, औद्योगिक-पूर्व काल (1850–1900) के मुकाबले 1.44 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। दो डेटासेट में 2025 को अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल बताया गया, जबकि छह डेटासेट में इसे तीसरा सबसे गर्म साल माना गया। 2023, 2024 और 2025—तीनों ही साल सभी रिकॉर्ड्स में सबसे गर्म वर्षों की सूची में शामिल हैं।
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्ट साउलो ने कहा कि वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों का लगातार जमा होना इस स्थिति का मुख्य कारण है। बढ़ते तापमान के चलते हीटवेव, अत्यधिक बारिश और तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसी घटनाएं और ज्यादा खतरनाक हो रही हैं। ऐसे में समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों और वैश्विक सहयोग की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
महासागरों की स्थिति भी चिंताजनक है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, वैश्विक ऊष्मीकरण से पैदा होने वाली लगभग 90 प्रतिशत अतिरिक्त गर्मी महासागरों में जमा हो रही है। 2024 से 2025 के बीच महासागरों की ऊपरी परत में ऊष्मा सामग्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये आंकड़े साफ संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है।



