रांची: झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में रांची जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के दिशा-निर्देश पर आज से जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान (MDA) की शुरुआत हो गई है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कांके में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त (DDC) सौरभ कुमार भुवनिया ने दीप प्रज्वलित कर इस महाअभियान का शुभारंभ किया।

खुद दवा खाकर दिया सुरक्षा का संदेश

अभियान की गंभीरता को समझते हुए उप विकास आयुक्त ने न केवल खुद फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया, बल्कि स्कूल की छात्राओं सुषमा और निशा को भी अपने सामने दवा खिलाई। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, “फाइलेरिया की दवा पूरी तरह सुरक्षित है। इस बीमारी का एक बार होने के बाद कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए समय रहते दवा का सेवन ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।”

लक्ष्य: 4 प्रखंड और 5.5 लाख नागरिक

यह विशेष अभियान 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा। रांची के 14 प्रखंड पहले ही फाइलेरिया मुक्त घोषित किए जा चुके हैं, जबकि शेष चार प्रखंडों राहे, सोनहातू, तमाड़ और कांके में अभी 29 सक्रिय मामले हैं। प्रशासन ने इन क्षेत्रों के 5,57,970 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 619 बूथ बनाए गए हैं जहाँ 1,238 स्वास्थ्य कर्मी तैनात रहेंगे।

दवा सेवन के जरूरी नियम

स्वास्थ्य विभाग ने दवा के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां भी जारी की हैं:

  • दवा कभी भी खाली पेट न लें।

  • 2 वर्ष से कम के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमार लोग यह दवा न लें।

  • दवा लेने के बाद अगर मामूली सिरदर्द, चक्कर या उल्टी महसूस हो, तो घबराएं नहीं; यह शरीर में कीटाणुओं के मरने का संकेत है।

जागरूकता रथ और शपथ

इस अवसर पर डीडीसी ने एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो गांव-गांव जाकर लोगों को बीमारी के लक्षणों और बचाव के प्रति सचेत करेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों और छात्राओं को ‘फाइलेरिया मुक्त झारखंड’ के निर्माण की शपथ दिलाई गई। मौके पर सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

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