World News: अगले हफ्ते ब्राजील में होने जा रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल नहीं होंगे। जिसको लेकर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला द सिल्वा परेशान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के राष्ट्रपति की ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की शिड्यूल से परेशानी हैं और इसलिए वो इसमें शामिल नहीं होंगे। चीनी राष्ट्रपति की जगह देश के पीएम ली कियांग अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इसमें शामिल होंगे। लेकिन परदे के पीछे से आ रही रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शी जिनपिंग, भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी के लिए रखी गई डिनर पार्टी से नाराज हैं।
चीन के राष्ट्रपति के सम्मेलन में शामिल न होने के कारण
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला द सिल्वा ने भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को सम्मेलन के बाद विशेष स्टेट डिनर के लिए आमंत्रित किया है। इसकी वजह से बीजिंग काफी असहज हो गया है। कहा जा रहा है कि चीन को आशंका है कि यदि शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो ब्राजील और भारत के नेताओं की आपसी मुलाकात इस मंच से महफिल लूट लेगी। और चीनी राष्ट्रपति की भूमिका सिर्फ साइड एक्टर की तरह नजर आएगी। जो विदेशों में बनाई गई उनकी सशक्त नेता की छवि को धूमिक कर सकती है।
क्या मोदी को मिली स्पेशल ट्रीटमेंट से नाराज़ हैं शी?
ब्राजील के अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति लूला ने मई 2025 में चीन की यात्रा भी विशेष रूप से इसलिए की थी, ताकि शी जिनपिंग को ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में आमंत्रित किया जा सके। उन्होंने इसे गुडविल जेस्चर बताते हुए उम्मीद जताई थी, कि शी जिनपिंग ब्राजील दौरे को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। ब्राजील के विशेष विदेश नीति सलाहकार सेल्सो अमोरीम ने भी चीनी विदेश मंत्री वांग यी के सामने इस मुद्दे को उठाया भी था। फिर भी चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स (BRICS) में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
वांग यी से की गई विशेष बातचीत का कोई असर नहीं
दूसरी तरफ चीनी अधिकारियों का कहना है कि शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग की अनुपस्थिति की अटकलों का एक और कारण यह है, कि लूला और शी जिनपिंग एक साल से भी कम समय में दो बार मिल चुके हैं। उनकी पहली मुलाकात जी20 शिखर सम्मेलन में पिछले साल नवंबर में ब्रासीलिया की राजकीय यात्रा के दौरान, और फिर मई में बीजिंग में चीन-सेलाक फोरम के दौरान हो चुकी है।
हू जिंताओ की भागीदारी और मौजूदा परिदृश्य की तुलना
चीन ने कहा है कि वह ब्राजील की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता का समर्थन करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग अपने सदस्यों के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। चीनी अधिकारियों ने कहा है कि एक अस्थिर और अशांत दुनिया में, ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्र अपने रणनीतिक संकल्प को बनाए रखते हैं और वैश्विक शांति, स्थिरता और विकास के लिए मिलकर काम करते हैं। लेकिन चीन की ये दलील पल्ले नहीं पड़ रही है। क्योंकि द्विपक्षीय मुलाकात अलग है और ब्रिक्स (BRICS) एक मल्टीफोरम प्लेटफॉर्म है।
क्या शी जिनपिंग की अनुपस्थिति से चीन की साख पर असर पड़ेगा?
साल 2008 में जब ब्रिक्स (BRICS) का पहला शिखर सम्मेलन ब्राजील में ही हुआ था, उस वक्त चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ चीन में आए विनाशक भूकंप के बावजूद शामिल हुए थे। वो भले ही एक ही दिन रहे, फिर भी वो शामिल हुए थे। विदेश मामलों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि शी जिनपिंग अगर ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में शामिल नहीं होते हैं तो इससे ब्राजील-चीन रिश्तों को झटका लगेगा और चीन की उन कोशिशों को भी झटका लगेगा, जिसमें वो खुद को ब्रिक्स (BRICS) में नेतृत्वकारी भूमिका में दिखाना चाहता है।
इस खबर को भी पढ़ें : होर्मुज स्ट्रेट पर संकट: ईरान की धमकी से मचा हड़कंप, भारत-चीन की तेल आपूर्ति पर संकट!
इस खबर को भी पढ़ें : ऑपरेशन सिंदूर : सेना और सरकार ने किए कई खुलासे, चीन ने जताया खेद



