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खनिज के पैसे से चमकेंगे गांव या होगा फंड का ‘दुरुपयोग’? सदन में छिड़ी तीखी बहस

रांची: झारखंड की धरती सोना उगलती है, लेकिन क्या उस ‘सोने’ (खनिज संपदा) का लाभ उन लोगों को मिल रहा है जो धूल और धुएं के बीच रहते हैं? सोमवार को झारखंड विधानसभा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर सत्ता

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रांची: झारखंड की धरती सोना उगलती है, लेकिन क्या उस ‘सोने’ (खनिज संपदा) का लाभ उन लोगों को मिल रहा है जो धूल और धुएं के बीच रहते हैं? सोमवार को झारखंड विधानसभा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त बहस छिड़ी। सदन में यह सवाल उठा कि क्या यह पैसा सिर्फ कागजों पर खर्च हो रहा है या वाकई जमीन पर बदलाव दिख रहा है।

30 किलोमीटर का दायरा और विकास का संतुलन

विधायक प्रदीप यादव ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने केंद्र के नए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या विकास सिर्फ खदान के 15 से 25 किलोमीटर के दायरे तक ही सीमित रहेगा? यादव का तर्क था कि अगर नियम इतने कड़े रहे, तो जिले के बाकी हिस्से विकास की दौड़ में पिछड़ जाएंगे। उन्होंने सारंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खदानों के आसपास गांव कम हैं, ऐसे में करोड़ों का फंड बिना इस्तेमाल के पड़ा रह सकता है।

बाबूलाल मरांडी का हमला : ‘खनन के पैसे से बन रहे हैं जिम’

चर्चा में तब नया मोड़ आया जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने फंड के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक दिलचस्प वाकया सुनाते हुए कहा, “मैं हाल ही में लातेहार गया था, वहां मुझे एक आलीशान जिम दिखाया गया। बाद में पता चला कि यह जनता के बुनियादी विकास के लिए आए DMFT फंड से बनाया गया है।” मरांडी ने बोकारो और रामगढ़ में भी फंड की धांधली के आरोप लगाए और मांग की कि दायरे को बढ़ाने से पहले विधानसभा की एक विशेष टीम गठित कर जांच कराई जाए कि अब तक का पैसा कहां गया।

सरकार का पक्ष : नियमों के दायरे में हो रहा है काम

सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र महतो ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि झारखंड जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियम, 2024 के तहत सीधे प्रभावित क्षेत्रों (15 किमी) और अप्रत्यक्ष क्षेत्रों (25 किमी) में राशि खर्च की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्राम सभा और स्थानीय प्रतिनिधियों की सलाह पर ही योजनाएं बनती हैं। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ शिकायतों की जांच चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इस विषय पर सदन में औपचारिक प्रस्ताव लाने का सुझाव दिया, ताकि इस पर व्यापक नीति बनाई जा सके। अब देखना यह है कि क्या यह फंड वाकई उन आदिवासियों और ग्रामीणों के जीवन में उजाला ला पाता है, जिनके हक की बात सदन के गलियारों में गूंज रही है।

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