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बंगाल के स्कूल में आधी रात रेड: बंद कमरे से 1.77 करोड़ कैश जब्त, अकाउंटेंट हिरासत में!

Kolkata: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापारा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी स्कूल के बंद कमरे से पुलिस ने छापेमारी कर करीब 1.77 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी (कैश) जब्त की है। वित्तीय अनियमितताओं और

बंगाल स्कूल कैश बरामदगी
बंगाल स्कूल कैश बरामदगी

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Kolkata: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापारा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी स्कूल के बंद कमरे से पुलिस ने छापेमारी कर करीब 1.77 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी (कैश) जब्त की है। वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के पुख्ता इनपुट पर चलाए गए इस विशेष गोपनीय तलाशी अभियान के बाद, पुलिस ने संस्थान के मुख्य लेखाकार (अकाउंटेंट) अभीक कुमार नाग को हिरासत में ले लिया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुआ यह सर्च ऑपरेशन रात भर चला। इस दौरान स्कूल के एक लॉकअप रूम से नकदी से ठसाठस भरे आठ बड़े पैकेट बरामद किए गए। बरामद नोटों की संख्या इतनी अधिक थी कि उनकी गिनती के लिए तत्काल तीन नोट काउंटिंग मशीनें मंगवानी पड़ीं। नोटों को गिनने का यह सिलसिला देर रात से शुरू होकर अगली सुबह तक जारी रहा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जब्त की गई इस विशाल राशि के कानूनी स्रोत (Source) को लेकर अब तक कोई भी संतोषजनक दस्तावेज या स्पष्टीकरण पेश नहीं किया जा सका है।

रसूखदारों के नाम शिकायत, छानबीन तेज

हिरासत में लिए गए अकाउंटेंट अभीक कुमार नाग से स्कूल परिसर के भीतर इतनी बड़ी रकम छिपाकर रखने के कारणों पर कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस मामले में वित्तीय हेराफेरी और जालसाजी को लेकर अभीक के साथ-साथ कमल अधिकारी, गौतम घोष दस्तीदार और सयान नाग के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। गौरतलब है कि नामजद आरोपियों में शामिल कमल अधिकारी, कांचरापारा नगर पालिका के अध्यक्ष और बिजपुर के पूर्व विधायक के भाई हैं, जिसके कारण इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) विकास चंद्र पाल ने पुलिस के दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जब्त किया गया सारा पैसा पूरी तरह संस्थान का ही है, जिसे छात्रों के एडमिशन फीस (प्रवेश शुल्क) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से एकत्र किया गया था। हालांकि, पुलिस अब स्कूल के पुराने वित्तीय रिकॉर्ड्स, लेजर बुक्स और बैंक खातों के दस्तावेजों की गहराई से फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि जब्त कैश आधिकारिक तौर पर दर्ज लेनदेन से मेल खाता है या यह किसी बड़े घोटाले का हिस्सा है।

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