Health Desk: चिकित्सा विज्ञान में हुए एक नए अध्ययन ने फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) को विटामिन B12 की कमी से जोड़कर एक नई बहस छेड़ दी है। विटामिन B12, जो हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स (RBC) के निर्माण और नसों की मजबूती के लिए अनिवार्य है, अब लिवर को स्वस्थ रखने के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। 2022 के एक गहन अध्ययन के मुताबिक, B12 और फोलिक एसिड की कमी से लिवर की कोशिकाओं में मौजूद एक खास प्रोटीन ‘सिंटाक्सीन 17’ (Syntaxin 17) की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिससे लिवर में फैट तेजी से जमा होने लगता है।
अमीनो एसिड का खतरा और ‘NASH’ का डर
शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन B12 की कमी से शरीर में होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड बढ़ जाता है। यह एसिड लिवर के फंक्शन को बुरी तरह बाधित करता है और साधारण फैटी लिवर को एक खतरनाक स्थिति NASH (नॉन-अल्कोहोलिक स्टेटोहैपेटाइटिस) में बदल देता है। राहत की बात यह है कि रिसर्च के दौरान जिन मरीजों को विटामिन B12 और फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स दिए गए, उनके लिवर की सूजन और फाइब्रोसिस (लिवर का सख्त होना) में जबरदस्त सुधार देखा गया।
सस्ता और असरदार इलाज
विशेषज्ञों का मानना है कि विटामिन B12 और फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि बेहद सस्ते और आसानी से उपलब्ध भी हैं। यह खोज उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो लिवर ट्रांसप्लांट जैसी महंगी और जटिल सर्जरी के मुहाने पर खड़े हैं। यदि समय रहते विटामिन प्रोफाइल की जांच करा ली जाए, तो भविष्य के बड़े खतरों को टाला जा सकता है।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
फैटी लिवर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन अगर आपको लगातार थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, तेजी से वजन गिरना या आंखों और त्वचा में पीलापन (जॉन्डिस जैसे लक्षण) महसूस हो रहा है, तो तुरंत अपने लिवर प्रोफाइल और विटामिन B12 की जांच करवाएं। भारत में तेजी से बढ़ती नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) अब केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि खराब जीवनशैली और पोषण की कमी के कारण आम लोगों को भी अपना शिकार बना रही है।
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