Lucknow: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी सूची में 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, आठ प्रदेश महामंत्री, 19 प्रदेश मंत्री समेत कई अहम पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी ने संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ नए चेहरों को भी प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
घोषित सूची के अनुसार सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, धर्मेंद्र सिंह, प्रियंका रावत, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, राजेश यादव और आलोक गुप्ता सहित कई नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं रामप्रताप सिंह चौहान, गीता शाक्य, अभिजात मिश्रा, उपेंद्र रावत और संजय राय को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन में सामाजिक संतुलन पर जोर
प्रदेश मंत्रियों की सूची में विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, राकेश बिंद, राहुल वाल्मीकि और आकांक्षा सोनकर समेत कई नेताओं को शामिल किया गया है। सूची से साफ संकेत मिलता है कि भाजपा ने पिछड़े वर्ग, दलित, महिला और युवा नेतृत्व को संगठन में व्यापक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई है।
इसके साथ ही पार्टी ने छह क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय अध्यक्षों की भी घोषणा की है। पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी नबाब सिंह नागर, ब्रज क्षेत्र की पूरन लाल लोधी, कानपुर क्षेत्र की राम किशोर साहू, अवध क्षेत्र की अवधेश द्विवेदी, काशी क्षेत्र की अशोक चौरसिया और गोरखपुर क्षेत्र की विनोद राय को सौंपी गई है।
मीडिया और विभिन्न मोर्चों में भी बदलाव
संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत दीक्षित को कार्यालय मंत्री, अतुल अवस्थी और लक्ष्मण सिंह को कार्यालय सह-मंत्री बनाया गया है। वहीं दिनेश प्रताप सिंह को मुख्य प्रवक्ता, मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया संयोजक और हिमांशुराज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा ने विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की भी घोषणा की है। रोहित मिश्रा को युवा मोर्चा, प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा, देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा, अशोक रावत को अनुसूचित मोर्चा, सरोज कुशवाह को महिला मोर्चा और विद्याभूषण गोंड को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की नई संगठनात्मक टीम आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, सामाजिक आधार का विस्तार करने और चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति का हिस्सा है।




