Ujjain: धर्म की नगरी उज्जैन से 35 किलोमीटर दूर नागदा तहसील के गुराडिया सांगा गांव में आस्था की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाए। अमूमन मन्नत पूरी होने पर लोग देवी-देवताओं को प्रसाद, फूल या चादर चढ़ाते हैं, लेकिन शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक मंदिर में भक्त मनोकामना पूरी होते ही दीवार घड़ी भेंट करते हैं। करीब 70 साल पुराने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बने इस देवस्थान पर वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है, जिसके चलते अब पेड़ की डालियों और लटकती जटाओं में सैकड़ों घड़ियों का पहाड़ खड़ा हो चुका है।
अनोखी परंपरा की वजह क्या है
गांव-जवार के लोगों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस पावन थान पर सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद कबूल होती है। कोई बाल-बच्चों की सलामती और गृह-क्लेश से मुक्ति की गुहार लगाता है, तो कोई लंबे समय से अटके रोजगार और नौकरी के लिए अरदास लगाता है। जैसे ही व्यक्ति का बुरा वक्त टलता है और काम बन जाता है, वह सीधे यहां आकर अपनी सामर्थ्य के अनुसार घड़ी बांध देता है। लोगों का कहना है कि यह चढ़ावा दरअसल अच्छे वक्त की शुरुआत और ईश्वर के प्रति आभार जताने का जरिया है।
कहां लगा है घड़ियों का अंबार
यह नजारा महिदपुर-उन्हेल मुख्य मार्ग के पास स्थित शिप्रा नदी के कछार में साफ दिखता है। पुराने बरगद के तने से लेकर जमीन छूती लताओं तक हर तरफ छोटी-बड़ी और रंग-बिरंगी घड़ियां लटकी नजर आती हैं। दूर-दराज से आने वाले मुसाफिर और दर्शनार्थी जब एक साथ इतनी घड़ियों को टिक-टिक करते देखते हैं, तो अपनी नजरें नहीं हटा पाते। आलम यह है कि यह धार्मिक स्थल अब सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर इलाके में कौतूहल और भारी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।





