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Home»World»ट्रंप का टैरिफ बम फिर फूटा: भारत-अमेरिका ट्रेड डील संकट में!
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ट्रंप का टैरिफ बम फिर फूटा: भारत-अमेरिका ट्रेड डील संकट में!

ट्रंप ने फिर फोड़ा टैरिफ बम, व्हाइट हाउस ने शुरू कर दिया काम...अमेरिका ने व्यापारिक साझेदारों को भेजना शुरू किया पत्र, इसमें टैरिफ दरें निर्धारित की जाएंगी
Faizal HaqueBy Faizal HaqueJuly 4, 20256 Mins Read
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India News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से टैरिफ का राग अलापा है। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका शुक्रवार से अपने व्यापारिक साझेदारों को पत्र भेजना शुरू कर देगा। इसमें टैरिफ दरें निर्धारित की जाएंगी। निर्धारित की गई टैरिफ दरों का भुगतान देशों को अगले महीने की शुरुआत से करना होगा।

ट्रेड डील के लिए यूएस गई टीम भारत लौटी… कुछ मुद्दों पर नहीं बनी बात

राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ट्रंप लगातार टैरिफ के मुद्दे को लेकर चर्चा में बने हैं। फरवरी 2025 से शुरू हुई टैरिफ की कहानी जारी है। अप्रैल में उन्होंने टैरिफ लागू कर दिया लेकिन बाद इसे उन्होंने इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया। इसके साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों से टैरिफ के मुद्दे पर बातचीत भी कर रहा है। भारत और अमेरिका के बीच भी ट्रेड डील पर सहमति होनी है। सूत्रों के अनुसार यह अपने अंतिम चरण पर है। अगर ट्रेड डील पूरी हो जाती है तो टैरिफ से भारत को कुछ राहत मिल सकती है।

ट्रंप बोले 10 से 70 फीसदी तक लगाएंगे टैरिफ

9 जुलाई को टैरिफ पर लगी 90 दिनों की रोक खत्म हो रही है। इससे पहले अमेरिकी प्रशासन उन देशों को लेटर भेज सकता है जिन देशों से ट्रेड को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि टैरिफ दरें 10-20 प्रतिशत के बीच शुरू हो सकती हैं और 70 प्रतिशत तक जा सकती हैं। शुक्रवार को 10 से 12 देशों को पत्र भेजे गए हैं। अगले कुछ दिनों में और भी भेजे जाएंगे। मुझे लगता है कि 9 जुलाई तक सभी कवर हो जाएंगे। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, या क्या कुछ वस्तुओं पर टैरिफ अधिक रेट से लगाया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि 1 अगस्त से टैरिफ के जरिए आने वाली राशि अमेरिका में आनी शुरू हो जाएगी।

किन-किन देशों के साथ हुई ट्रेड डील

अभी तक तीन देशों चीन, वियतनाम और यूनाइटेड किंगडम से अमेरिका की ट्रेड डील साइन हुई है। वियतनाम से बुधवार को डील साइन हुई थी। इसकी घोषणा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका वियतनाम से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामान पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा तथा वियतनाम से होकर आने वाले सामान पर 40 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा।

भारत-अमेरिका की ट्ऱेड डील अंतिम चरण में

अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील अपने अंतिम चरण पर है। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार जल्द ही व्यापार समझौते की घोषणा हो सकती है। डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन के प्रतिनिधियों ने बार-बार भारत के साथ आगामी ट्रेड डील की बात कही है। भारत की ओर से वार्ताकार इस डील पर बात करने वॉशिंगटन डीसी पहुंचे हैं। 3 जुलाई को ऐसी खबरें आईं जिसमें कहा गया कि अगले 2 दिन यानी 48 घंटों में भारत और अमेरिका के बीच मिनी ट्रेड डील पर अंतिम मुहर लग सकती है।

कई मुद्दों पर नहीं बनी सहमति

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता को लेकर अमेरिका गई भारत की टीम वापस आ चुकी है। मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय दल अंतरिम व्यापार समझौते पर वार्ता का एक और दौर पूरा करने के बाद वाशिंगटन से वापस आई है, लेकिन चर्चा अभी जारी रहेगी। अधिकारी ने कहा कि अभी कई मुद्दों जैसे- एग्रीकल्चर और ऑटो पर सहमति नहीं बन पाई है, इसलिए अभी चर्चा आगे जारी रहेगी। अधिकारी ने कहा कि वार्ता अंतिम चरण में है और इसके फैसले का ऐलान 9 जुलाई से पहले होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी कृषि और ऑटो सेक्टर्स को लेकर अभी मुद्दे सुलझाने की आवश्यकता है। भारतीय टीम 26 जून से 2 जुलाई तक अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर वार्ता के लिए अमेरिका गई थी। ये चर्चाएं महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ का निलंबन 9 जुलाई को समाप्त हो रहा है। दोनों पक्ष उससे पहले वार्ता को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे हैं। भारत ने अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को शुल्क रियायत देने पर अपना रुख कड़ा कर लिया है और इसपर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहता है, क्योंकि यह रणनीतिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्र है, जो भारत के डील करने पर एक बड़ा झटका जैसा हो सकता है।

भारत का सख्त रुख

भारतीय व्यापार समझौता करने वाला दल वापस ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने ऐलान किया था कि भारत टैरिफ में बहुत बड़ी कटौती करने जा रहा है और अमेरिका के लिए अपना मार्केट खोल रहा है। वहीं यह भी खबर आई थी कि भारत 48 घंटे के अंदर डील कर सकता है। हालांकि अब भारत का ये कदम, इसके सख्त रुख को दर्शाता है। भारत कई चीजों पर सहमत नहीं है और अमेरिका की मांग को नकार रहा है। भारत ने ऑटो सेक्टर में 25 प्रतिशत शुल्क को लेकर मुद्दा उठाया है। इसने विश्व व्यापार संगठन की सुरक्षा समिति में इस मामले को उठाया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ को यह भी बताया है कि उसने स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिकी टैरिफ के जवाब में चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। भारत द्वारा डब्ल्यूटीओ को भेजे गए एक संदेश में कहा गया है कि 26 मार्च, 2025 को अमेरिका ने यात्री वाहनों और हल्के ट्रकों के आयात पर और भारत में या वहां से आने वाले कुछ ऑटोमोबाइल पाट्र्स पर 25 प्रतिशत की टैरिफ ग्रोथ के रूप में एक उपाय किया है।

भारत से क्या चाहता है अमेरिका

अमेरिका कुछ टेक्नोलॉजीज प्रोडक्ट्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स और सेब, ट्री नट्स और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों जैसी कृषि वस्तुओं पर शुल्क रियायतें भी चाहता है। वहीं डेयरी को लेकर भी भारत से डील करना चाहता है, लेकिन भारत ने अभी तक इसपर डील नहीं की है।

भारत अमेरिका से क्या रियायत चाहता है

भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे सेक्टर्स के लिए शुल्क रियायतें चाहता है।

अगर नहीं बनी सहमति तो…

जिस प्रकार से दोनों देश एग्री, ऑटो और अन्य सेक्टर्स को लेकर किसी रास्ते पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर इन दोनों देशों के लिए फिर क्या विकल्प बचेगा। कुछ एक्सपट्र्स कह रहे हैं कि अगर सहमति नहीं बनती है तो हो सकता है कि इन दोनों देशों के बीच एक मिनी ट्रेड डील हो, जिसमें विवादित क्षेत्रों को छोडक़र बाकी पर डील पूरी की जा सकती है।

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