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World News: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में नजर आए। उन्होंने नाटो (NATO) और यूरोपीय देशों को निशाने पर लेते हुए दो टूक कहा कि अमेरिका अब दूसरों की सुरक्षा का बोझ नहीं उठाएगा। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि नाटो से अमेरिका को “मौत, अशांति और बेहिसाब पैसा खर्च करने” के अलावा अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।
NATO प्रमुख के सामने ही सुनाई खरी-खोटी
हैरानी की बात यह रही कि जब ट्रंप यह बयान दे रहे थे, तब दर्शक दीर्घा में NATO प्रमुख मार्क रुटे खुद मौजूद थे। ट्रंप ने उनकी ओर इशारा करते हुए याद दिलाया कि कैसे उनके दबाव में नाटो देशों ने अपना रक्षा बजट बढ़ाया है। ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका सालों से रूस जैसे खतरों से यूरोप की रक्षा कर रहा है, लेकिन बदले में उसे वह सम्मान और सहयोग नहीं मिलता जिसका वह हकदार है।
ग्रीनलैंड: युद्ध नहीं, पर नीति साफ़ है
पिछले कुछ समय से चर्चा में रहे ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी ट्रंप ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “अगर मैं अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करूं, तो अमेरिका कुछ भी हासिल कर सकता है, हमें कोई नहीं रोक सकता। लेकिन मैं ग्रीनलैंड के लिए युद्ध या बल प्रयोग नहीं करूंगा।” हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए क्योंकि यह रूस और चीन के बीच सुरक्षा की एक अहम कड़ी है।
“पश्चिमी गोलार्ध हमारा है, बाहरी दखल मंजूर नहीं”
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को एक विशाल, असुरक्षित और अविकसित द्वीप बताते हुए कहा कि यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य हित बताते हुए कहा, “सैकड़ों सालों से हमारी नीति रही है कि बाहरी शक्तियों को अपने गोलार्ध में न आने दें। आज हम जितने मजबूत हैं, उतने पहले कभी नहीं थे।”
ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहाँ वे नाटो की उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक द्वीपों पर अमेरिका का दावा ठोक कर नई बहस छेड़ दी है।

