Kolkata: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक उठापटक के बीच बागी हुए विधायकों की मुख्य खेमे में वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। उत्तर 24 परगना जिले की आमडांगा विधानसभा सीट से टीएमसी विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट से खुद को अलग करते हुए ममता बनर्जी के खेमे में लौटने का ऐलान किया है। पार्टी में घर वापसी करते हुए उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि ‘दीदी ही हमारे लिए सब कुछ हैं।’
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इससे पहले पार्टी के 50 से अधिक विधायकों ने बागी रुख अपनाते हुए ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट का समर्थन किया था। अब कासेम सिद्दीकी के इस फैसले को ममता बनर्जी खेमे के लिए एक बड़ी राहत और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
‘धोखे से कराए गए थे हस्ताक्षर’
ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी दोहराते हुए कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट का साथ छोड़ने की वजह भी बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ धोखा हुआ था। उनसे यह कहकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे कि ये बातें दीदी तक पहुंचाई जाएंगी और बागी गुट भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा।
सिद्दीकी ने कहा, “जब मैं उस गुट से जुड़ा तो देखा कि वहां तृणमूल सुप्रीमो का कोई नाम या जिक्र तक नहीं था। दीदी ने हमें टिकट दिया और विधानसभा भेजा। हमने उनकी तस्वीर दिखाकर जनता से वोट मांगे और जनता ने भी उन्हें देखकर हमें चुना। जब तक राजनीति में रहेंगे, दीदी के साथ ही रहेंगे।”
मुस्लिम समुदाय में मजबूत पकड़
हुगली जिले के ऐतिहासिक फुरफुरा शरीफ दरगाह से ताल्लुक रखने वाले पीरजादा कासेम सिद्दीकी का मुस्लिम समुदाय में अच्छा प्रभाव माना जाता है। वे पिछले साल ही टीएमसी में शामिल हुए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्य महासचिव बनाया और आमडांगा से टिकट देकर विधायक बनवाया।
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इधर, पार्टी के भीतर दो गुटों की खींचतान अब कानूनी रास्ते पर भी पहुंच गई है। दोनों गुटों ने 28 अगस्त को मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के पास तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस मनाने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट की ओर से दाखिल याचिका पर अदालत ने त्वरित सुनवाई की मांग को स्वीकार कर लिया है।




