Close Menu
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Facebook X (Twitter) Instagram
Public AddaPublic Adda

  • Home
  • India
  • World
  • States
    • Jharkhand
    • Bihar
    • Uttar Pradesh
  • Politics
  • Sports
  • Interesting
  • More Adda
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Home»Interesting»कांप उठेगी रूह: यहां मौत के बाद गिद्धों को खिलाया जाता है इंसानी शव!
Interesting

कांप उठेगी रूह: यहां मौत के बाद गिद्धों को खिलाया जाता है इंसानी शव!

तिब्बत की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा 'स्काई बुरियल' में मौत के बाद शवों को जलाने या दफनाने के बजाय पहाड़ पर ले जाकर गिद्धों के हवाले कर दिया जाता है।
By Samsul HaqueJune 17, 20265 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp Threads Telegram
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Telegram WhatsApp Threads Copy Link

अपनी भाषा चुनेें :

बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...

New Delhi: दुनिया के अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में अंतिम संस्कार के कई तरीके प्रचलित हैं। कहीं शव को अग्नि के हवाले किया जाता है, तो कहीं दफनाया जाता है और कहीं-कहीं शव को पवित्र नदियों या समुद्र में प्रवाहित कर दिया जाता है। लेकिन भारत के बिल्कुल नजदीक एक ऐसा इलाका भी है, जहां मौत के बाद शव को किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी पर ले जाकर भूखे गिद्धों के सामने खुला छोड़ दिया जाता है। इतना ही नहीं, इस रस्म के दौरान शव को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा भी जाता है ताकि पक्षी उसे आसानी से खा सकें। पहली नजर में यह परंपरा बेहद अजीब और डरावनी लगती है, लेकिन वहां के निवासियों के लिए यह एक बेहद पवित्र और गहरी धार्मिक रस्म है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से मृत व्यक्ति की आत्मा को हर बंधन से मुक्ति मिलती है और वह अपने अगले जन्म की यात्रा पर आसानी से निकल जाती है।

शरीर को प्रकृति को लौटाना है सबसे बड़ा दान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह अनोखी और विचलित कर देने वाली परंपरा तिब्बत में निभाई जाती है। इस रस्म को ‘स्काई बुरियल’ (Sky Burial) या आकाशीय अंतिम संस्कार कहा जाता है। तिब्बती बौद्ध धर्म में यह परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी वहां के कई सुदूर इलाकों में इसका पूरी आस्था के साथ पालन किया जाता है। तिब्बत के लोगों का दृढ़ विश्वास है कि मृत्यु के बाद इंसानी शरीर सिर्फ एक खाली खोल या पिंजरे की तरह रह जाता है। चूंकि आत्मा शरीर को छोड़ चुकी होती है, इसलिए इस मृत शरीर को प्रकृति को सौंप देना ही संसार का सबसे बड़ा दान माना जाता है।

इस रस्म के तहत, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके शव को एक सफेद कपड़े में लपेटकर घर के ही एक शांत कोने में रख दिया जाता है। आमतौर पर तीन से पांच दिनों तक शव को इसी तरह घर में रखा जाता है। इस दौरान बौद्ध भिक्षु और लामा वहां लगातार धार्मिक मंत्रों और प्रार्थनाओं का जाप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस प्रार्थना से मृतक की आत्मा को परम शांति मिलती है और उसे स्वर्ग की ओर जाने का सही रास्ता दिखाई देता है।

शव को मां के गर्भ की मुद्रा में मोड़ा जाता है

लामीय गणना के अनुसार एक शुभ दिन तय होने के बाद, शव को पहाड़ों के बीच बने विशेष स्काई बुरियल स्थलों पर ले जाया जाता है। ये स्थल आमतौर पर इंसानी आबादी से बहुत दूर और ऊंचाई पर बने होते हैं। इस अंतिम सफर से पहले शव को एक विशेष भ्रूण जैसी मुद्रा (Fetal Position) में मोड़ा जाता है। यानी शरीर को ठीक उसी तरह बांधकर रखा जाता है जैसे कोई बच्चा मां के गर्भ के भीतर रहता है। इसके बाद अलसुबह सूर्योदय से पहले शव को पहाड़ की दुर्गम चोटी पर पहुंचाया जाता है, जहां विशेष रूप से प्रशिक्षित और दीक्षित लोग ही इस अंतिम रस्म को पूरा करते हैं।

हड्डियों को पीसकर जौ के आटे में मिलाते हैं

सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, स्काई बुरियल के इस विशेष कर्मकांड को करने वाले लोग (जिन्हें श्मशान कर्मी या रॉ क्यपा कहा जाता है) शव को बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में काटते हैं ताकि गिद्ध उसे बिना किसी परेशानी के तुरंत खा सकें। इसके बाद पहाड़ की चोटियों पर रहने वाले जंगली गिद्धों को एक खास आवाज देकर बुलाया जाता है। कुछ ही पलों में वहां दर्जनों खूंखार गिद्धों का झुंड पहुंच जाता है और शव के मांस को पूरी तरह खा जाता है।

जब शरीर का मांस पूरी तरह खत्म हो जाता है, तब वहां मौजूद लोग बची हुई हड्डियों को पत्थरों से पीसकर बारीक चूरा बनाते हैं। इस चूरे को जौ के आटे और मक्खन के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है और फिर से गिद्धों के सामने खाने के लिए डाल दिया जाता है। तिब्बती बौद्ध धर्म में गिद्धों को बेहद पवित्र पक्षी का दर्जा हासिल है। लोगों का विश्वास है कि यदि गिद्ध शव को पूरी तरह साफ कर जाएं, तो इसका सीधा मतलब है कि मृत व्यक्ति ने अपने जीवन में अच्छे कर्म किए थे और उसकी आत्मा को मोक्ष मिल गया है। वहां के लोग गिद्धों को धरती और स्वर्ग के बीच एक दिव्य संदेशवाहक के रूप में देखते हैं।

कठिन भौगोलिक हालात भी हैं बड़ी वजह

इस अनोखी अंतिम संस्कार पद्धति के पीछे केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं, बल्कि तिब्बत के बेहद कठिन भौगोलिक हालात भी एक बहुत बड़ी वजह रहे हैं। तिब्बत का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों, पथरीली वादियों और जमी हुई सख्त चट्टानी जमीन से घिरा हुआ है। ऐसे पथरीले और बर्फीले इलाकों में कब्र खोदना लगभग नामुमकिन होता है। इसके साथ ही, अत्यधिक ऊंचाई होने के कारण यहां पेड़-पौधे और लकड़ियों की भारी कमी रहती है, जिससे शवों का पारंपरिक रूप से दाह संस्कार करना बेहद खर्चीला और कठिन काम है। इसी व्यावहारिक समस्या के कारण सदियों पहले यह परंपरा शुरू हुई और धीरे-धीरे यह वहां के धार्मिक विश्वासों का एक अटूट हिस्सा बन गई।

स्काई बुरियल को तिब्बती समाज में इतना पवित्र और निजी माना जाता है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या विदेशी पर्यटक को इस समारोह को देखने या इसमें शामिल होने की कतई अनुमति नहीं होती। यहां तक कि मृतक के सगे परिवार वाले भी इस अंतिम चीर-फाड़ की प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद नहीं रहते। उनका मानना है कि किसी भी बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति से भटकती हुई आत्मा की इस पवित्र यात्रा में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Follow on Google News
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Threads Copy Link

Related Posts

टिकटॉक पर किस करने वाले कपल को मिली खौफनाक सजा; सरेआम बरसाए गए कोड़े

July 3, 2026

117 किलो के बच्चे की हार्ट फेलियर से मौत, पेरेंट्स पर मर्डर का केस

July 2, 2026

स्कॉटिश मनी ट्री: इस पेड़ पर फलों की जगह जड़े हैं हजारों सिक्के, जानिए इसकी वजह

July 2, 2026

RECENT ADDA.

विस्थापितों के अधिकार और न्याय के लिए राज्यव्यापी आंदोलन चलाएगी लोकहित अधिकार पार्टी

July 11, 2026

हवाला नेटवर्क के जरिए शूटरों को फंडिंग करने वाले दो शातिर गिरफ्तार

July 11, 2026

14 जुलाई को सभी बूथों पर चुनाव पाठशाला और बीएलओ-बीएलए की संयुक्त बैठक

July 11, 2026

रांची नगर निगम की बैठक में 25 प्रस्तावों पर लगी मुहर, पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग

July 11, 2026

‘टाइगर’ ने ‘ग्लाइडर’ को 3-0 से रौंदा, MMK हाई स्कूल में इंटर हाउस फुटबॉल टूर्नामेंट शुरू

July 11, 2026
Today’s Horoscope
© 2026 Public Adda. Designed by Launching Press.
  • About
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Adsense

Home

News

Web Stories Fill Streamline Icon: https://streamlinehq.com

Web Stories

WhatsApp

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.