Palamu: झारखंड के पलामू जिले को दहला देने वाले बहुचर्चित चैनपुर नाबालिग दुष्कर्म व हत्याकांड को बीते 10 महीने हो चुके हैं, लेकिन पुलिस की फाइलों में यह जघन्य वारदात अब भी अनसुलझी पहेली बनी हुई है। मासूम के गुनहगारों तक पहुंचने के लिए पलामू पुलिस ने अब वैज्ञानिक अनुसंधान का दायरा और व्यापक कर दिया है। मामले में ताजा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 14 नए संदिग्धों के डीएनए सैंपल एकत्र कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजे हैं। इसके साथ ही दो मुख्य संदिग्धों का लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) टेस्ट कराने की विधिक प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
7 नवंबर 2025 की वो खौफनाक रात
यह हृदयविदारक वारदात 7 नवंबर 2025 को शुरू हुई थी, जब चैनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों ने रात-दिन एक कर तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। गुमशुदगी के दो दिन बाद यानी 9 नवंबर को घर से कुछ ही दूरी पर स्थित एक वीरान कुएं से बच्ची का शव मिलने पर पूरे इलाके में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों के चिकित्सीय परीक्षण में सामने आया कि मासूम के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार की गई थीं और फिर निर्ममता से उसकी हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया गया था। घटना की क्रूरता ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित निर्भया कांड के दर्द को ताजा कर दिया था।
सड़क पर उतरे थे लोग, SIT के जिम्मे जांच
घटना के बाद पूरे पलामू में आक्रोश भड़क उठा था। पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर लंबे समय तक न्याय की गुहार लगाई और विरोध प्रदर्शन किए। जनआक्रोश और अपराध की विभीषिका को देखते हुए जिला पुलिस ने आनन-फानन में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। तब से लेकर आज तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।
33 तक पहुंची डीएनए टेस्ट कराने वालों की संख्या
सदर एसडीपीओ राजेश यादव के अनुसार, पुलिस किसी भी निर्दोष को फंसाए बिना केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर असली कातिलों की गर्दन तक पहुंचना चाहती है। पूर्व में भी शक के घेरे में आए 19 व्यक्तियों के डीएनए प्रोफाइलिंग कराए जा चुके हैं। अब 14 नए व्यक्तियों के सैंपल भेजे जाने के बाद इस मामले में कुल डीएनए परीक्षणों की संख्या 33 पहुंच गई है।
अधिकारियों का मानना है कि नए नमूनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और दो संदिग्धों के लाई डिटेक्टर टेस्ट से घटनाक्रम की टूटती कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जब तक प्रयोगशाला से आधिकारिक डीएनए मैचिंग और पॉलीग्राफ की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी संदिग्ध की सीधी संलिप्तता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। 10 महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार नम आंखों से न्याय के इंतजार में बैठा है।



