World News: चोरी अब महज अपराध नहीं, बल्कि डिमांड और सप्लाई पर चलने वाला ग्लोबल बिज़नेस मॉडल बन चुका है। यूरोप से चोरी हुई लग्ज़री कारें, स्मार्ट मोबाइल फोन्स और ट्रैक्टर बड़े पैमाने पर ब्रिटेन के जरिए अफ्रीका, खाड़ी देशों, रूस और चीन तक पहुंच रही हैं। पुलिस ने इस नेटवर्क को “ग्रैंड थेफ्ट ग्लोबल इंक” नाम दिया है।
दरअसल अब वह जमाना नहीं रहा जबकि चोरी न सिर्फ अपराध बल्कि सामाजिक व्यवस्था में भी घृणित कार्य माना जाता था। अब चोरी व्यापार की तरह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है। अर्थशास्त्र के मांग और पूर्ति वाले सिद्धांत पर की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ब्रिटेन इस समय चोरी के सामान का सबसे बड़ा निर्यातक बना हुआ है। बताया जा रहा है कि फेलिक्सस्टो जैसे बड़े बंदरगाहों से हर दिन हजारों कंटेनर बाहर भेजे जाते हैं। चोरी का सामान कंटेनरों में छिपाकर विदेश भेजा जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में कंटेनरों की पूरी जांच असंभव है।
- तेजी से बढ़ती वाहन चोरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2020 में ब्रिटेन में 90,000 कारें चोरी हुईं। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.3 लाख पहुंच गया। लंदन में एक साल में 70,000 से अधिक मोबाइल फोन चोरी हुए।
- कार चोरी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
किसी लग्जरी कार की डिमांड आने पर चोर पहले कार का सिक्योरिटी सिस्टम और जीपीएस हैक करते हैं। नकली नंबर लगाकर गिरोह को बेचते हैं और कंटेनरों में भेज देते हैं। हर 4 में से 3 चोरी की कारें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो पहुंचती हैं। टोयोटा हिलक्स जैसी गाड़ियां अफ्रीका में दोगुनी कीमत पर बिकती हैं। यूएई दूसरी सबसे बड़ी मार्केट है, जहां कारें अक्सर ऑर्डर पर चोरी होती हैं।
- फोन चोरी का नेटवर्क
बताया जा रहा है कि लंदन में छीने गए फोन तुरंत डीलरों को बेचे जाते हैं। एक अनलॉक फोन पर 15-20 हजार रुपये तक मिलते हैं। फोन चीन के शेनझेन के हुआक्यांगबेई मार्केट में बड़े पैमाने पर बिकते हैं।
- कृषि उपकरणों की चोरी
यूरोप से चोरी हुए ट्रैक्टर और हार्वेस्टर रूस व पूर्वी यूरोप भेजे जाते हैं। रूस पर प्रतिबंध के बाद इनकी मांग कई गुना बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में कृषि उपकरण चोरी में 137प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। रूस में एक ट्रैक्टर 80 लाख रुपये और उसका जीपीएस किट 10-12 लाख रुपये में बिकता है।
इससे साफ है कि चोरी अब स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार बन चुकी है, जिसमें ब्रिटेन एक बड़े हब के रूप में सामने आ रहा है।



