India News: साल 2025 का पहला सूर्यग्रहण शनिवार को लगाने वाला है। यह एक आंशिक सूर्यग्रहण होगा, इस उत्तरी अमेरिका के साथ ही पश्चिमी यूरोप, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और रूस में देखा जा सकेगा। साथ ही यह संभवतः सबसे खतरनाक भी होगा। पर्यवेक्षकों का कहना है कि शनिवार को लगने वाला सूर्यग्रहण आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।
सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है। चंद्रमा की मौजूदगी सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध कर देती है और हमें सूरज छिपा हुआ दिखाता है। सूर्यग्रहण तीन प्रकार का होता हैं पूर्ण, आंशिक और वलयाकार या रिंग ऑफ फायर। पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान दिन में अंधेरा छा जाता है।
इस बार लगने जा रहा सूर्यग्रहण आंशिक होगा। यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है, इसकारण इसका आकार छोटा होता है और यह सूर्य के कोरोना को पूरी तरह से नहीं ढंक पाता है। हालांकि, कुछ हिस्सों में यह सूर्य की डिस्क को 93.8 प्रतिशत तक ढंक लेगा। कनाडा के उत्तरी क्यूबेक के नुनाविक स्थित गांव में रहने वालों को सबसे बड़ा ग्रहण दिखाई देगा।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि सूर्य कभी भी पूरी तरह से ढका नहीं होगा, इसलिए सूर्यग्रहण को देखना खतरनाक होगा। ग्रहण के दौरान सूर्य को देखने के लिए ग्रहण का चश्मा या सोलर फिल्टर की आवश्यकता होगी। इस धूप के चश्मे के साथ न देखने की सलाह दी गई है। फोटोग्राफरों को सौर फिल्टरों का इस्तेमाल करना चाहिए।
इस ग्रहण का सबसे ज्यादा असर उत्तरी अमेरिका में होगा, जहां यह साल 2025 का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण होगा। हालांकि, इस साल एक और आंशिक सूर्यग्रहण होगा, लेकिन 21 सिंतबर को होने वाले इस सूर्यग्रहण को केवल दक्षिणी गोलार्द्ध में देखा जा सकेगा। अमेरिकी समय के अनुसार, यह सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 8.43 बजे समाप्त होगा। हालांकि, इसे अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय में देखा जा सकेगा। चूंकि इसका छाया पथ भारतीय क्षेत्र से नहीं गुजरेगा, इसलिए भारत से सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सकेगा।
इस सूर्यग्रहण को देखने के लिए सबसे अच्छी जगहें अंटार्कटिका और न्यूजीलैंड होंगी, जहां चंद्रमा सूर्य के 73 प्रतिशत हिस्से को ढंका दिखाई देगा। इसके बाद पृथ्वी पर अगला आंशिक सूर्यग्रहण 2029 में होगा।