New Delhi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हुई हालिया बड़ी टूट और उसके बागी सांसदों द्वारा भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने के फैसले पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक विशेष बातचीत में थरूर ने इस कदम को सीधे तौर पर लालच, तात्कालिक फायदे या केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों का परिणाम बताया और भारतीय राजनीति में बढ़ती ‘सिद्धांतहीनता’ पर गहरा खेद व्यक्त किया।
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“सत्ताधारी पार्टी की शक्ति और प्रलोभन का नतीजा”
शशि थरूर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि इन दलबदलुओं के पीछे सत्ताधारी पार्टी की शक्ति और प्रलोभन ही मुख्य रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों के उस बड़े गुट का जिक्र किया, जिन्होंने खुलकर एनडीए के साथ जुड़ने की घोषणा की है।
थरूर ने अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “ये वही सांसद हैं जो पिछले 12 सालों से एनडीए और उसकी नीतियों पर संसद से लेकर सड़क तक लगातार हमले करते रहे हैं। ऐसे में अचानक उनमें एनडीए के लिए यह गुण दिखना, यह साफ दर्शाता है कि हमारे देश की राजनीति अब बिना सिद्धांतों वाली हो गई है, और यह बेहद दुखद है।”
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद शुरू हुई थी बगावत
यह राजनीतिक उठापटक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद सामने आई, जब टीएमसी को गंभीर आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस बगावत की शुरुआत सबसे पहले बंगाल विधानसभा से हुई थी, जहां 58 विधायकों ने बगावत का झंडा उठाया और विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके कुछ ही समय बाद संसद में भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ गईं, जहाँ पहले तीन राज्यसभा सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया और फिर 20 लोकसभा सांसदों ने एक साथ नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) में शामिल होकर एनडीए सरकार को समर्थन देने का बड़ा फैसला किया।
विरोधी आपके दुश्मन नहीं: थरूर
थरूर ने बातचीत में जोर देकर कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपने विचारों और सिद्धांतों पर हमेशा अडिग रहना चाहिए, लेकिन उनका मुख्य मकसद हमेशा देश के सामूहिक हित में काम करना होना चाहिए। उन्होंने राजनेताओं को सलाह देते हुए कहा, “अपनी सोच पर अडिग रहें और मिलकर रचनात्मक ढंग से काम करें। मैंने हमेशा कहा है कि दूसरी विचारधारा वाले लोग आपके दुश्मन नहीं हैं। वे केवल आपके राजनीतिक विरोधी हैं और आपका असली काम देश के सामूहिक हित के लिए नीतियां बनाना है।”
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कांग्रेस नेता ने आगे स्पष्ट किया कि राजनीति का सही अर्थ यह होना चाहिए कि आप मानते हैं कि आपका तरीका दूसरों के तरीके से बेहतर है, और यह देश के लिए एक बेहतर दृष्टि (विजन) प्रदान करता है। उन्होंने जोर दिया कि राजनीति में बने रहने का मूल तर्क ही यही है कि आपके पास एक ऐसा विजन हो जिससे एक बेहतर भारत और एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके। आज के दौर में जब सिद्धांतों पर आधारित राजनीति का पतन हो रहा है, थरूर के ये शब्द भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी प्रस्तुत करते हैं।




