Tehran, (Iran): इजराइल पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में एक बेहद अलग और चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला है। हमलों की खबर फैलते ही बड़ी तादाद में महिलाएं और आम शहरी आधी रात को ही सड़कों पर उतर आए। इस दौरान पूरी राजधानी में जश्न और आक्रोश का एक मिला-जुला माहौल दिखाई दिया, जहां लोग अपने देश की सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन करते नजर आए।

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विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से मिसाइलें दागे जाने के बाद तेहरान में रातभर लोग सड़कों पर डटे रहे। हाथों में ईरान के राष्ट्रीय झंडे लिए प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजराइल मुर्दाबाद” के गगनभेदी नारे लगाए। सड़कों पर गाड़ियों के हॉर्न और लोगों का हुजूम इस बात गवाह था कि वे इस सैन्य कदम से बेहद उत्साहित हैं।

महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी और राजनीतिक स्टैंड

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियो रिपोर्टों में साफ देखा जा सकता है कि इन रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तेहरान की ये महिलाएं केवल भीड़ का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि वे युद्ध या कूटनीतिक समझौतों से जुड़े गंभीर वैश्विक मुद्दों पर अपनी राजनीतिक राय भी खुलकर रख रही थीं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने साफ तौर पर अमेरिका के साथ किसी भी तरह की संभावित बातचीत या ढुलमुल समझौते का कड़ा विरोध किया।

घरेलू राजनीति और वैचारिक जंग का बड़ा संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सड़कों पर उतरी यह भीड़ सिर्फ एक तात्कालिक या भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे ईरान की आंतरिक राजनीति और मध्य-पूर्व के क्षेत्रीय टकराव का एक बड़ा कूटनीतिक संदेश छिपा है। राजधानी तेहरान के मुख्य चौराहों पर जुटी इस भीड़ ने पूरी दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि ईरान सरकार की इजराइल-विरोधी और आक्रामक विदेश नीति को वहां की आम जनता का पूरा और मजबूत समर्थन हासिल है।

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ऐसे समय में जब ईरान और इजराइल के बीच सैन्य तनाव अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, तेहरान की सड़कों पर दिखा यह जनसमर्थन बेहद मायने रखता है। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह महासंग्राम अब सिर्फ दो देशों की सेनाओं या मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह से एक वैचारिक, राजनीतिक और जनभावनाओं का भी युद्ध बन चुका है।

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