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टीबी उन्मूलन अभियान को मिली बड़ी ताकत, 638 मरीजों को निक्षय मित्रों ने लिया गोद

Chaibasa news: पश्चिमी सिंहभूम जिले में ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के माध्यम से टीबी उन्मूलन अभियान जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग निक्षय मित्र बनकर टीबी

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Chaibasa news: पश्चिमी सिंहभूम जिले में ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के माध्यम से टीबी उन्मूलन अभियान जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों के उपचार और पोषण में सहयोग कर रहे हैं। अब तक जिले में 155 व्यक्ति एवं संस्थाओं ने 638 टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें नियमित रूप से पोषण सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है।

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अप्रैल 2026 से 1 जुलाई 2026 तक जिले में उपचाररत टीबी मरीजों की संख्या 3,320 है। मरीजों को बेहतर पोषण और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में सरकारी पदाधिकारी, कर्मचारी, निजी अस्पताल, सामाजिक संस्थाएं, जेएसएलपीएस के सीएलएफ तथा अन्य संगठनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।

अभियान के तहत उपायुक्त मनीष कुमार ने स्वयं 51 टीबी मरीजों को गोद लिया है। वहीं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने 21, झींकपानी की प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा आइंद ने 22, आरईओ चक्रधरपुर के कार्यपालक अभियंता विकास खलखो ने 20, झींकपानी के अंचलाधिकारी नितेश खलखो ने 17 तथा सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी सहित कई पदाधिकारियों ने 11-11 मरीजों को गोद लेकर सहयोग किया है।

निजी स्वास्थ्य संस्थानों ने भी अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सृष्टि अल्ट्रासाउंड एवं आई क्लिनिक, प्रवीण अल्ट्रासाउंड एवं आई क्लिनिक, गायत्री सेवा सदन, लाइफ नर्सिंग होम, संजीव नेत्रालय, सनराइज अस्पताल तथा सीएलएफ सोनुवा ने 11-11 टीबी मरीजों को गोद लिया है। वहीं मूंदड़ा अस्पताल, जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनीला खलखो, जिला कल्याण पदाधिकारी गोपी उरांव तथा जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने 10-10 मरीजों की जिम्मेदारी ली है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निक्षय मित्र द्वारा गोद लिए गए प्रत्येक टीबी मरीज को छह माह तक पोषाहार की टोकरी उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली टीबी रोधी दवाओं का नियमित सेवन भी सुनिश्चित कराया जाता है, ताकि वे शीघ्र स्वस्थ हो सकें।

उपायुक्त मनीष कुमार ने जिले के सभी सक्षम नागरिकों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निजी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अधिक से अधिक संख्या में निक्षय मित्र बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस अभियान से जुड़े। जनसहभागिता ही पश्चिमी सिंहभूम को टीबी मुक्त बनाने की सबसे बड़ी ताकत है।

जिला प्रशासन का मानना है कि ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से बढ़ रही जनभागीदारी न केवल टीबी मरीजों को बेहतर पोषण और उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि समाज में टीबी के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का भी प्रभावी संदेश दे रही है।

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