World News: अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर है। पाकिस्तान द्वारा 9 अक्टूबर को किए गए एयर स्ट्राइक के जवाब में तालिबान ने सीमा पर कई पाकिस्तानी चौकियों पर एक साथ हमला कर दिया। तालिबान के मुताबिक, उन्होंने कुछ चौकियों पर कब्जा भी कर लिया, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में कई तालिबान लड़ाके मारे गए।

तालिबान की सैन्य क्षमता

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 में अफगानिस्तान की सैन्य ताकत दुनिया में 118वें स्थान पर है। 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान एक संगठित सैन्य बल के रूप में उभरा है। इनके पास अनुमानित 1.10 से 1.50 लाख सक्रिय सैनिक, करीब 1 लाख रिजर्व फोर्स, 14,000 करोड़ रुपये का सैन्य बजट और हल्के हथियार, रॉकेट, तोपें व अमेरिकी हथियारों का कुछ स्टॉक मौजूद है। हालांकि हवाई जहाज और नौसेना की कमी इनकी कमजोरी है।

गुरिल्ला युद्धकौशल ही सबसे बड़ी ताकत

तालिबान का सबसे बड़ा हथियार उनका गुरिल्ला युद्धकौशल है। पहाड़ी इलाकों व कठिन भूगोल का फायदा उठाकर छोटे समूह अचानक हमला करते हैं। सीमा के पास रहने वाला पश्तून समुदाय रसद और सहायता प्रदान करता है, जिससे रिजर्व फोर्स जरूरत पड़ते ही जुट जाती है।

हालिया हमला और क्षेत्रीय सुरक्षा संकट

रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान ने कुणार-बाजौर, हेलमंद और पक्तिया क्षेत्रों में कई चौकियों पर रात के अंधेरे में हमला किया। भारी गोलीबारी और तोपों के इस्तेमाल से सीमा पर स्थिति बिगड़ गई है। यह संघर्ष डूरंड लाइन पर हो रहा है, जो अफगानिस्तान-पाकिस्तान की विवादित 2,640 किमी लंबी सीमा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात काबू में नहीं आए तो यह संघर्ष पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

Share.
Exit mobile version