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Kabul (Afghanistan): अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने महिलाओं के अधिकारों को कुचलने की दिशा में एक और खौफनाक कदम उठाया है। अब देश भर में गर्भनिरोधक गोलियों (Contraceptives) के इस्तेमाल और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस फरमान के बाद न केवल दवाएं नष्ट की जा रही हैं, बल्कि कई निजी क्लीनिकों को जबरन बंद करा दिया गया है। इस पाबंदी ने अफगानी महिलाओं को एक ऐसे चक्रव्यूह में धकेल दिया है जहाँ बार-बार गर्भधारण और इलाज का अभाव उनकी जान ले रहा है।
क्लीनिकों में दवाओं की ‘होली’ और डॉक्टरों पर सख्ती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बदगीस और जवजजान जैसे प्रांतों में तालिबानी लड़ाकों ने क्लीनिकों में घुसकर गर्भनिरोधक दवाओं को नष्ट कर दिया। कंधार जैसे रूढ़िवादी इलाकों में अब महिलाएं पुरुष डॉक्टरों से परामर्श नहीं ले सकतीं, जिससे प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात देखभाल (Maternal Care) पूरी तरह ठप हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग रुकने से 440 से अधिक अस्पताल पहले ही बंद हो चुके हैं।
दर्दनाक दास्तां: 9 बार गर्भवती और 6 बार मिसकैरेज
तालिबानी राज में महिलाओं की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा कंधार की एक 36 वर्षीय महिला की कहानी से लगाया जा सकता है। नौ बार गर्भवती होने और छह बार मिसकैरेज के दर्द ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। वहीं, 42 साल की एक अन्य महिला, जो 12 बच्चों की मां है, अब हड्डियों के दर्द के कारण उठने में भी असमर्थ है। पति और समाज के दबाव में महिलाएं अपनी मर्जी से गर्भनिरोधक का उपयोग नहीं कर पा रही हैं, जिससे वे गंभीर कुपोषण और एनीमिया का शिकार हो रही हैं।
शिक्षा और रोजगार से भी बेदखल
गर्भनिरोधक पर रोक के साथ-साथ तालिबान ने महिलाओं के जीवन को पूरी तरह सीमित कर दिया है:
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शिक्षा पर ताला: 12 साल से बड़ी लड़कियों के स्कूल और कॉलेज बंद हैं।
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काम पर पाबंदी: डॉक्टर, नर्स और शिक्षक जैसी पेशेवर महिलाओं की नौकरियां छीन ली गई हैं।
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पहरेदारी में जीवन: बिना पुरुष अभिभावक (मेहरम) के घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित है और बुर्का अनिवार्य कर दिया गया है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अफगानिस्तान में 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं कुपोषित हैं। यदि स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं पर यह पाबंदी जारी रही, तो अफगानिस्तान दुनिया में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) के मामले में सबसे खतरनाक देश बन जाएगा।
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