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World News: सिडनी के बॉन्डी बीच पर यहूदी समुदाय के हनुक्का उत्सव के दौरान हुई सामूहिक गोलीबारी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में एक मासूम बच्ची सहित कुल 16 लोगों की जान चली गई। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यह हमला इस्लामिक स्टेट (IS) की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित लगता है। उन्होंने इसे नफरत की वह सोच करार दिया जो पिछले एक दशक से युवाओं को उग्रवाद की ओर धकेल रही है।
जांच में पता चला है कि इस वहशी कृत्य को अंजाम देने वाले कोई और नहीं बल्कि 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसका 24 वर्षीय बेटा नवीद अकरम थे।
फिलीपींस में मिलिट्री ट्रेनिंग का शक और सुरक्षा चूक पर सवाल
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, हमलावर पिता-पुत्र पिछले महीने फिलीपींस की यात्रा पर गए थे। खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि वे वहां मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के उद्देश्य से गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि नवीद अकरम 2019 में खुफिया एजेंसी ASI O की निगरानी में था, लेकिन तब उसे तत्काल खतरा नहीं माना गया था। साजिद के पास छह हथियारों का वैध लाइसेंस था, जिनका उपयोग शाम 6:47 बजे फुटब्रिज से अंधाधुंध फायरिंग करने के लिए किया गया। इस दौरान हमलावरों ने कुल 103 राउंड गोलियां चलाईं।
इस अंधकार के बीच मानवता की किरण बनकर उभरे अहमद अल अहमद, जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर एक हमलावर से हथियार छीन लिया और सैकड़ों लोगों को बचा लिया। ऑस्ट्रेलियाई पीएम और इजराइली पीएम ने अहमद की बहादुरी को सलाम किया है। साजिद की मौत पुलिस मुठभेड़ में हो चुकी है, जबकि नवीद अस्पताल में है। ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम संगठनों ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे इस्लाम के खिलाफ बताया है। पीएम अल्बनीज ने देश के बंदूक कानूनों को और कड़ा करने का संकल्प लिया है।

