रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में सोमवार को एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कड़े समन के बावजूद राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के बेटे रोहित उरांव रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए। रोहित उरांव और उनके पिता रामेश्वर उरांव दोनों ने ही केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच में शामिल होने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई है। फिलहाल, उरांव परिवार के इस अनुरोध पर ईडी ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और यह मामला एजेंसी के उच्च अधिकारियों के स्तर पर विचाराधीन है।

गौरतलब है कि ईडी ने शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के इस गंभीर मामले में रोहित उरांव को 29 जून को पूछताछ के लिए तलब किया था। वहीं, उनके पिता और झारखंड के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव को अगले दिन यानी 30 जून को पेश होने का नोटिस दिया गया है।

क्या है यह पूरा मामला और छत्तीसगढ़ कनेक्शन?

यह पूरा विवाद झारखंड की ‘नई उत्पाद नीति-2022’ के क्रियान्वयन के दौरान हुई कथित भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। इस मामले में पहले राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आबकारी नीति में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर एक प्राथमिकी (कांड संख्या 09/2025) दर्ज की थी। इसी एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईसीआईआर संख्या 10/2025 दर्ज कर जांच की कमान अपने हाथ में ली। जांच एजेंसी अवैध वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) की कड़ियों को जोड़ने के लिए लगातार दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।

इस मामले की जड़ें साल 2023 से जुड़ी हैं, जब 23 अगस्त 2023 को ईडी ने एक साथ रांची, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और कोलकाता समेत कुल 32 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान रोहित उरांव के रांची स्थित आवास से 30 लाख रुपये की नकदी बरामद होने का दावा किया गया था।

जांच एजेंसी को गहरा संदेह है कि झारखंड में नई आबकारी नीति लागू होने के दौरान छत्तीसगढ़ की कुछ चुनिंदा कंपनियों को शराब आपूर्ति और मैनपावर सप्लाई का ठेका दिलाने में राज्य के कुछ बेहद प्रभावशाली लोगों ने अपनी भूमिका निभाई थी। ईडी की रडार पर विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की कंपनी ‘श्री ओम साई बेवरेजेज प्रा. लि.’ है, जिसे झारखंड में ठेका दिलाने में रोहित उरांव की कथित संलिप्तता की गहन पड़ताल की जा रही है। आरोप यह भी हैं कि झारखंड की शराब नीति को कथित तौर पर ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ की तर्ज पर ढाला गया, टेंडर की शर्तों में हेरफेर कर खास कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब बेचकर करोड़ों का कमीशन वसूला गया। फिलहाल जांच जारी है और अब सभी की नजरें ईडी के अगले कदम पर टिकी हैं।

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