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अच्छे-बुरे स्पर्श की पहचान से पॉक्सो कानून तक, बच्चों को मिली जरूरी सीख

रांची के डीपीएस डोरंडा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा 'सुरक्षित बचपन अभियान' के तहत आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम, पॉक्सो एक्ट और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट।

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Ranchi: जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची के तत्वावधान में गुरुवार (05 नवंबर 2026) को डीपीएस स्कूल, डोरंडा में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।

यह अभियान माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा, सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश, माननीय सदस्य सचिव, झालसा कुमारी रंजना अस्थाना एवं माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष डालसा, रांची, अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन तथा डालसा सचिव के नेतृत्व में सुनिश्चित किया गया है।

पॉक्सो एक्ट और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष फोकस

डालसा सचिव राकेश रौशन ने मुख्य रूप से पॉक्सो एक्ट (POCSO Act-2012) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए इस अधिनियम के प्रति समाज के प्रत्येक वर्ग में जागरूकता फैलाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील गतिविधियों से संरक्षण प्रदान किया गया है। साथ ही, इस अधिनियम में बच्चों के अनुकूल जांच और न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान है ताकि पीड़ित बच्चे को कम से कम मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि डालसा टीम द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम व नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाते हैं।

समाज की नैतिक जिम्मेदारी और विशेषज्ञों के विचार

कार्यक्रम के दौरान ‘लाइफ सेवर एनजीओ’ के प्रमुख अतुल गेरा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि एनजीओ डालसा, रांची के साथ समन्वय स्थापित कर स्कूलों में बच्चों को पॉक्सो एक्ट के बारे में लगातार जानकारी दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।

डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित बचपन ही एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार रखें, उन्हें ‘गुड टच और बैड टच’ (अच्छे और बुरे स्पर्श) के बारे में बताएं तथा किसी भी असहज परिस्थिति में बिना डरे अपनी बात रखने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करें।

महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी

कार्यक्रम के अंत में बच्चों और शिक्षकों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रमुख हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई:

  • राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन: 15100

  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098

  • साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930

इस अवसर पर डालसा सचिव राकेश रौशन, डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा, लाइफ सेवर एनजीओ के प्रमुख अतुल गेरा, पीएलवी (PLV) गणेश कुमार, अमित बड़ाईक, दिपेन्द्र कुमार, प्रदीप नाग, नमिता देवी के साथ-साथ डीपीएस स्कूल के सम्मानित शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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