Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की कथित अवहेलना से जुड़े मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने रांची की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में चल रही इस मामले की कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर इस पूरे प्रकरण पर जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी विवाद ईडी द्वारा भेजे गए उन 10 समन से जुड़ा है, जो रांची के बड़गाईं अंचल जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में हेमंत सोरेन को जारी किए गए थे। ईडी का आरोप है कि 14 अगस्त 2023 से शुरू हुए समन के सिलसिले में मुख्यमंत्री केवल दो बार उपस्थित हुए, जबकि अन्य मौकों पर उन्होंने समन की अनदेखी की। इसे ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 63 और आईपीसी की धारा 174 के तहत गैरकानूनी बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

रांची की सीजेएम कोर्ट ने 4 मार्च 2024 को इस मामले में संज्ञान लिया था, जिसके बाद केस एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में स्थानांतरित हुआ। मुख्यमंत्री ने झारखंड हाईकोर्ट में इस संज्ञान आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन वहां से राहत न मिलते हुए ट्रायल आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट में सोरेन की दलील

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस जॉयमंगल बागची की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सोरेन की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिन समन पर मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं हो सके थे, उनका बाकायदा लिखित जवाब दिया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि बाद के समन पर वे एजेंसी के समक्ष पेश भी हुए थे, इसलिए ईडी का यह शिकायतवाद पूरी तरह ‘दुर्भावनापूर्ण’ है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल ट्रायल की प्रक्रिया को थाम दिया है।

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