Ranchi : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (GRAMG) के खिलाफ सोमवार को राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। यह संयुक्त प्रदर्शन वामपंथी दलों, शोधकर्ताओं और विभिन्न मज़दूर संगठनों के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना किसी मज़दूर संगठन, किसान समूह, राज्य सरकारों या अन्य हितधारकों से परामर्श किए इस विधेयक को ला रही है। उनका कहना है कि यह प्रस्तावित कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (नरेगा) जैसे अधिकार-आधारित कानून को समाप्त कर, उसे एक केंद्र-नियंत्रित और विवेकाधीन योजना में बदलने का प्रयास है। प्रदर्शनकारियों ने इसे अलोकतांत्रिक प्रक्रिया बताते हुए संविधान की मूल भावना के खिलाफ करार दिया।

वक्ताओं ने कहा कि नया विधेयक मांग-आधारित रोज़गार के अधिकार को खत्म कर बजट-सीमित और आपूर्ति-आधारित योजना लागू करना चाहता है। इससे ग्रामीण मज़दूरों की काम की गारंटी समाप्त होगी, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और ग्राम सभाओं की भूमिका कमजोर होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बदलाव का सबसे अधिक असर सीमांत किसानों, दलितों, आदिवासियों और महिला मज़दूरों पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण संकट और पलायन बढ़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने GRAMG विधेयक की प्रति जलाकर अपना विरोध जताया। “नरेगा तो बहाना है, मक़सद ग़ुलाम बनाना है”, “नया बिल रद्द करो, नरेगा बहाल करो” और “नरेगा बचाओ, देश बचाओ, संविधान बचाओ” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस विरोध प्रदर्शन में भाकपा माले, सीपीएम, झारखंड जनाधिकार महासभा, नरेगा वॉच, नरेगा संघर्ष मोर्चा और आइसा (AISA) समेत कई संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।

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