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सैंटविता हॉस्पिटल राँची में राज्य का पहला लीडलेस डबल चेंबर पेसमेकर प्रत्यारोपण

Ranchi : सैंटविता हॉस्पिटल ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यहां पहली बार बिहार–झारखंड में डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह सफलता प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण कुमार और उनकी टीम ने हासिल की, जिसने

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Ranchi : सैंटविता हॉस्पिटल ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यहां पहली बार बिहार–झारखंड में डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह सफलता प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण कुमार और उनकी टीम ने हासिल की, जिसने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है।

यह खास तकनीक अक्टूबर 2025 में भारत में लॉन्च हुई है और देश में अभी सीमित जगहों पर ही उपलब्ध है। सैंटविता हॉस्पिटल ने इस उन्नत अमेरिकी तकनीक को अपनाते हुए गंभीर रूप से जटिल हृदय रोगी के जीवन को नई दिशा दी।

रोगी को वर्ष 2020 में पारंपरिक पेसमेकर लगाया गया था, लेकिन समय के साथ इसमें गंभीर संक्रमण विकसित हो गया। जांच के दौरान पता चला कि पेसमेकर की लीड के कारण सुपीरियर वेना कावा (SVC) में अत्यधिक सिकुड़न हो गई है। यह स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और ऐसे मामलों में पारंपरिक पेसमेकर को दोबारा लगाना संभव नहीं होता।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. वरुण कुमार ने संक्रमित पेसमेकर को लीड सहित सुरक्षित रूप से हटाने का निर्णय लिया, जो स्वयं में एक बड़ी चुनौती थी। इसके बाद टीम ने रोगी में नवीनतम डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर प्रत्यारोपित किया, जिसमें किसी भी प्रकार की सर्जिकल कटिंग या चीरा नहीं लगाया जाता।

यह तकनीक पैर की नस के माध्यम से सीधे हृदय तक पहुंचकर पेसमेकर को स्थापित करती है। इससे संक्रमण की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है और शरीर पर कोई बाहरी निशान भी नहीं रहता। जटिलताओं का जोखिम बेहद कम होने के कारण इसे आधुनिक हृदय चिकित्सा का भविष्य माना जा रहा है।

प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और रोगी को कुछ ही दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। टीम के अनुसार, यह तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए वरदान है जिन्हें संक्रमण, वेना कावा की सिकुड़न या पारंपरिक पेसमेकर से जुड़ी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सैंटविता हॉस्पिटल का यह कदम झारखंड ही नहीं बल्कि संपूर्ण पूर्वी भारत के लिए चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सफलता ने दिखा दिया है कि रांची अब जटिल हृदय उपचार में देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो रहा है।

डॉ. वरुण कुमार ने कहा कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में जीवनरक्षक साबित होगी और अधिकाधिक मरीजों को सुरक्षित, दर्दरहित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। अस्पताल प्रबंधन ने पूरी टीम की उपलब्धि को सराहते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया।

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