दावोस/रांची। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से झारखंड ने भारत के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच न्यू एज ग्रीन स्टील तकनीक को लेकर लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते के तहत झारखंड में 11,100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा, जिससे हरित, टिकाऊ और कम-कार्बन औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलेगी।

यह निवेश न केवल पर्यावरण के अनुकूल औद्योगीकरण की राह खोलेगा, बल्कि राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा। नीदरलैंड और जर्मनी जैसी विकसित औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में सफल हो चुकी ग्रीन स्टील तकनीकों को झारखंड में अपनाकर राज्य वैश्विक हरित विनिर्माण परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू HISARNA और EASyMelt जैसी अगली पीढ़ी की आयरनमेकिंग तकनीकों का उपयोग है, जिन पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। HISARNA तकनीक स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के लौह अयस्क से स्टील उत्पादन की क्षमता रखती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और लागत में कमी आएगी। साथ ही, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के माध्यम से यह तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है। टाटा स्टील वर्ष 2030 तक जमशेदपुर में लगभग 10 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है।

वहीं EASyMelt तकनीक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ बनाते हुए कोक की खपत कम करती है और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाने की क्षमता रखती है। यह दुनिया का अपनी तरह का पहला समाधान माना जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, औद्योगिक ढांचे को और सशक्त बनाने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कॉम्बी मिल तथा 2,600 करोड़ रुपये के टिनप्लेट विस्तार की भी योजना है। ये परियोजनाएं झारखंड को डी-कार्बोनाइजिंग वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।

बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन ने मुख्यमंत्री की सक्रिय वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, खनन और विनिर्माण के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य की आईटीआई संस्थाओं को उद्योगोन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा गोद लेने का प्रस्ताव रखा, जिसे कंपनी ने सहर्ष स्वीकार किया।

राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह समझौता झारखंड के पारंपरिक खनिज-आधारित राज्य से हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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